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सुकमा ,  जिले में सुरक्षा के साथ विकास और जनकल्याण की योजनाएं अब बदलाव की नई तस्वीर सामने ला रही हैं। शासन की योजनाओं के जमीनी प्रभाव को समझने के लिए चेन्नई से आए मीडिया अध्ययन दल ने जिले के विभिन्न क्षेत्रों का भ्रमण किया। प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (पीआईबी), चेन्नई द्वारा आयोजित मीडिया परिचय यात्रा के तहत पीआईबी चेन्नई के डायरेक्टर  अरुण कुमार पी. के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने बस स्टैंड, तुंगल डैम, पुनर्वास केंद्र और मिनपा कैंप का दौरा किया।

*सुरक्षा के साथ विकास की नई तस्वीर*

मीडिया प्रतिनिधियों ने पुलिस अधीक्षक मयंक गुर्जर से मुलाकात कर जिले में सुरक्षा व्यवस्था, विकास कार्यों और नक्सल प्रभाव से बाहर आ रहे क्षेत्रों में हो रहे बदलावों की जानकारी ली। एएसपी श्री रोहित शाह ने प्रतिनिधिमंडल को बस्तर की समृद्ध संस्कृति, प्राकृतिक सुंदरता और पर्यटन की संभावनाओं से भी अवगत कराया।

अधिकारियों ने बताया कि जिले में सुरक्षा के साथ विकास को प्राथमिकता देते हुए शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

*पुनर्वास नीति से परिवारों को मिल रहा नया जीवन*

मीडिया दल ने शासन की पुनर्वास नीति के सकारात्मक परिणामों को भी करीब से देखा। पुलिस अधीक्षक मयंक गुर्जर ने बताया कि आत्मसमर्पित माओवादियों और नक्सल प्रभावित परिवारों को आवास सहित 29 से अधिक शासकीय योजनाओं का लाभ दिलाया जा रहा है। साथ ही उन्हें कौशल विकास और रोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

मीडिया प्रतिनिधियों ने पुनर्वास नीति के माध्यम से प्रभावित परिवारों के जीवन में आए बदलावों और प्रशासन के प्रयासों की सराहना की।

*मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना से ग्रामीणों को बेहतर परिवहन सुविधा*

बस स्टैंड पर मीडिया दल ने मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना के तहत संचालित बसों का अवलोकन किया। प्रतिनिधियों ने ग्रामीण यात्रियों से बातचीत कर योजना से मिल रही परिवहन सुविधा के बारे में जानकारी ली।

ग्रामीण क्षेत्रों में बस सेवा की उपलब्धता से लोगों को बाजार, अस्पताल, स्कूल, कॉलेज और अन्य जरूरी सेवाओं तक पहुंचने में सुविधा मिल रही है। यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों को बेहतर परिवहन सुविधा से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।

*तुंगल कैफे में आत्मनिर्भरता की कहानी*

प्रतिनिधिमंडल ने तुंगल कैफे में कार्यरत महिलाओं से भी संवाद किया। यहां पांच पुनर्वासित महिलाएं और नक्सल प्रभावित परिवारों की पांच सदस्य मिलकर कैफे का संचालन कर रही हैं।

रोजगार के माध्यम से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही इन महिलाओं की कहानी ने मीडिया प्रतिनिधियों को प्रभावित किया। यह पहल बताती है कि पुनर्वास केवल सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रभावित परिवारों को सम्मानजनक रोजगार और आत्मनिर्भर जीवन से जोड़ने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।

*मिनपा कैंप और पुनर्वास केंद्र में ग्रामीणों से संवाद*

मीडिया अध्ययन दल ने सुकमा के पुनर्वास केंद्र और मिनपा कैंप का भी भ्रमण किया। प्रतिनिधियों ने ग्रामीणों और पुनर्वासित परिवारों से सीधे संवाद कर उनके अनुभव जाने और क्षेत्र में हो रहे बदलावों को समझा।

प्रतिनिधिमंडल ने सुकमा में सुरक्षा, विकास, पुनर्वास और जनकल्याण के समन्वित प्रयासों को सकारात्मक बदलाव की मजबूत आधारशिला बताया।

इस अवसर पर नोडल अधिकारी शंकर बघेल, सहायक नोडल अधिकारी सुखसागर वारे, डीएसपी सुकमा सौरभ उइके सहित पुलिस विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।

*विकास और विश्वास के साथ आगे बढ़ रहा सुकमा*

सुकमा की यह बदलती तस्वीर बताती है कि जब सुरक्षा के साथ शिक्षा, रोजगार, परिवहन, पुनर्वास और जनकल्याणकारी योजनाओं को एक साथ आगे बढ़ाया जाता है, तो दूरस्थ क्षेत्रों में भी विकास और विश्वास का नया वातावरण तैयार होता है। शासन की संवेदनशील पहल से प्रभावित परिवारों को मुख्यधारा से जोड़ने और ग्रामीणों के जीवन को आसान बनाने की दिशा में सुकमा लगातार आगे बढ़ रहा है।

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