दिसंबर 2023 में बच्चों में बौनापन (स्टंटिंग) की दर जो 30.27 प्रतिशत थी, वह जून 2026 तक घटकर 22.45 प्रतिशत रह गई है। इसके साथ ही वेस्टिंग में 4.36 प्रतिशत और अंडरवेट में 2.76 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।
राज्य ने राष्ट्रीय पोषण माह और पोषण पखवाड़ा के दौरान प्रति आंगनबाड़ी गतिविधियों में देशभर में पहला स्थान हासिल किया है। बाल संरक्षण के तहत मिशन वात्सल्य के जरिए संस्थाओं की संख्या बढ़कर 109 हो गई है तथा दत्तक ग्रहण और स्पॉन्सरशिप योजनाओं का दायरा भी बढ़ा है।
0-5 वर्ष के बच्चों में स्टंटिंग दर दिसंबर 2023 के 30.27% से घटकर जून 2026 में 22.45% हुई।
मनरेगा अभिसरण से 2,337 नए आंगनबाड़ी भवनों की स्वीकृति और पीएम जनमन से 191 केंद्र संचालित।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की संख्या 52,258 और सहायिकाओं की संख्या 51,548 तक पहुँची।
पोषण अभियान की गतिविधियों में छत्तीसगढ़ ने राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त किया।
दत्तक ग्रहण से लाभान्वित बच्चे 42 से बढ़कर 234 और स्पॉन्सरशिप वाले बच्चे 2,037 हुए।
बाल विवाह रोकने के प्रयासों से रोके गए बाल विवाहों की संख्या 109 से बढ़कर 888 हुई।
छत्तीसगढ़ में बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए एकीकृत बाल विकास सेवा (ICDS), मिशन वात्सल्य, पोषण अभियान और बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान जैसी योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। इन योजनाओं का मुख्य उद्देश्य कुपोषण को दूर करना और बाल सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
इन योजनाओं के विस्तार से राज्य के छोटे बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्रों में बेहतर पोषण और गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक शिक्षा मिलेगी। साथ ही अनाथ व बेसहारा बच्चों को संरक्षण प्राप्त होगा और बाल विवाह पर रोक लगने से बेटियों के भविष्य और स्वास्थ्य में सुधार होगा।
खबरें नहीं सच का प्रहार


No comments:
Post a Comment