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बस्तर, दृढ़ इच्छाशक्ति, आत्मविश्वास और निरंतर प्रयास के सामने शारीरिक चुनौतियां भी छोटी पड़ जाती हैं। बस्तर जिले के ग्राम बेंगलूर की रहने वाली कुमारी राखी नाग ने इसी संकल्प का प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत किया है। जन्म से लोकोमोटर दिव्यांगता से प्रभावित राखी अपने दोनों हाथों का उपयोग नहीं कर पाती हैं, लेकिन उन्होंने अपने दाहिने पैर से लिखकर छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल की 10वीं बोर्ड परीक्षा में 73.6 प्रतिशत अंक प्राप्त करते हुए प्रथम श्रेणी में सफलता हासिल की है।

पैरों से लिखकर की पढ़ाई
       स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय, नानगुर की छात्रा राखी नाग अपनी दैनिक पढ़ाई से लेकर परीक्षा तक का पूरा कार्य दाहिने पैर से लिखकर करती हैं। सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने कभी अपने सपनों को कमजोर नहीं पड़ने दिया। उनके पिता धनसिंह नाग, जो एक गैस एजेंसी में मजदूरी करते हैं, तथा माता श्रीमती चौती नाग ने आर्थिक चुनौतियों के बावजूद बेटी की शिक्षा को प्राथमिकता दी और हर कदम पर उसका हौसला बढ़ाया।

शिक्षकों के सहयोग से मिला सफलता का मार्ग
       विद्यालय निरीक्षण के दौरान खंड शिक्षा अधिकारी अनिल दास को राखी की विशेष परिस्थिति की जानकारी मिली। इसके बाद माध्यमिक शिक्षा मंडल के प्रावधानों के अनुसार उन्हें बोर्ड परीक्षा में राइटर (लेखन सहायक) की सुविधा उपलब्ध कराई गई। विद्यालय की कक्षा नवमी की छात्रा नव्या निर्मलकर ने पूरी जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के साथ परीक्षा के दौरान राइटर की भूमिका निभाई। वहीं विद्यालय के प्राचार्य विनोद सिंह भदौरिया तथा शिक्षकों ने निरंतर मार्गदर्शन और प्रोत्साहन देकर राखी के आत्मविश्वास को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।

बस्तर सांसद ने भेंट की इलेक्ट्रॉनिक व्हीलचेयर
      राखी नाग के संघर्ष और सफलता की प्रेरणादायी कहानी सामने आने के बाद बस्तर सांसद श्री महेश कश्यप स्वयं उनके ग्राम बेंगलूर स्थित निवास पहुंचे। उन्होंने राखी के अदम्य साहस और उपलब्धि की सराहना करते हुए उनकी पढ़ाई और आवागमन को और अधिक सुगम बनाने के उद्देश्य से उन्हें इलेक्ट्रॉनिक व्हीलचेयर भेंट की। सांसद ने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए आगे भी हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया।

संघर्ष से सफलता तक की प्रेरक कहानी
        राखी नाग की उपलब्धि यह संदेश देती है कि यदि परिवार का सहयोग, शिक्षकों का मार्गदर्शन और स्वयं पर विश्वास हो, तो कोई भी चुनौती सफलता की राह नहीं रोक सकती। पैरों से लिखकर प्रथम श्रेणी में बोर्ड परीक्षा उत्तीर्ण करने वाली राखी आज उन सभी विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत बन गई हैं, जो कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने सपनों को साकार करने का साहस रखते हैं।

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