बिलासपुर (छत्तीसगढ़): साइबर अपराधियों द्वारा फर्जी आईपीएस अधिकारी बनकर एक 68 वर्षीय सेवानिवृत्त बुजुर्ग को 'डिजिटल अरेस्ट' कर लगभग 35 लाख रुपये ठगने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। हालांकि, बिलासपुर पुलिस की त्वरित कार्रवाई और सूझबूझ से बुजुर्ग की पूरी जमा पूंजी डूबने से बचा ली गई।
IPS बनकर दिखाया मनी लॉन्ड्रिंग में फंसाने का डर
एडिशनल एसपी (ग्रामीण) मधुलिका सिंह से मिली जानकारी के अनुसार, सरकंडा क्षेत्र के सीपत रोड निवासी एक वरिष्ठ नागरिक को मोबाइल नंबर 9401274963 से फोन आया था। फोन करने वाले जालसाज ने खुद को बाराबंकी का आईपीएस अधिकारी 'सुनील कुमार गौतम' बताया।
जालसाज ने बुजुर्ग पर मनी लॉन्ड्रिंग के एक बड़े मामले में संलिप्त होने का झूठा आरोप लगाया और कानूनी कार्रवाई की धमकी देकर उन्हें मानसिक दबाव में ले लिया।
वीडियो कॉल पर निगरानी और 35 लाख रुपये जुटाने का दबाव
ठगों ने बुजुर्ग को लगातार वीडियो कॉल पर रखकर कैमरे के सामने बने रहने के लिए विवश किया और उन्हें 'डिजिटल अरेस्ट' का झांसा दिया। अपराधियों के दबाव में आकर पीड़ित ने अपने विभिन्न बैंक खातों में मौजूद रकम को एक ही खाते में जमा कर लिया, जिससे कुल राशि करीब 35 लाख रुपये हो गई।
आरोपी वीडियो मीटिंग के माध्यम से इस पूरी रकम को किसी अन्य खाते में ट्रांसफर करवाने की अंतिम तैयारी में थे।
मित्र की सतर्कता और पुलिस की तत्परता से टली ठगी
24 अगस्त को पीड़ित बुजुर्ग के एक मित्र को जब इस स्थिति का आभास हुआ, तो उन्होंने बिना देर किए बिलासपुर के डीआईजी एवं एसएसपी रजनेश सिंह को फोन पर पूरे घटनाक्रम से अवगत कराया।
सूचना मिलते ही एसएसपी के निर्देश पर सरकंडा थाना पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची। पुलिस टीम ने हस्तक्षेप कर बुजुर्ग को झांसे से बाहर निकाला और ऑनलाइन ट्रांसफर की प्रक्रिया को रुकवाकर खाते में मौजूद 35 लाख रुपये सुरक्षित बचा लिए। जांच में संबंधित मोबाइल नंबर के धोखाधड़ी से जुड़े होने की पुष्टि हुई है।
क्या होता है 'डिजिटल अरेस्ट'?
'डिजिटल अरेस्ट' साइबर अपराधियों द्वारा अपनाया जाने वाला एक नया और खतरनाक हथकंडा है। इसमें ठग खुद को पुलिस, सीबीआई (CBI), प्रवर्तन निदेशालय (ED), कस्टम या न्यायिक अधिकारी बताते हैं। वे आम नागरिकों को वीडियो कॉल के जरिए गैरकानूनी गतिविधियों, मनी लॉन्ड्रिंग या अवैध पार्सल के मामलों में फंसाने की धमकी देते हैं।
पीड़ितों को कैमरे के सामने लगातार रहने का दबाव बनाया जाता है ताकि वे किसी से संपर्क न कर सकें। इसके बाद कानूनी कार्रवाई से बचाने या केस खत्म करने के नाम पर बड़ी रकम ऐंठ ली जाती है। भारतीय कानून में 'डिजिटल अरेस्ट' जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया या प्रावधान नहीं है।
इस मामले में नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCCRP) पर औपचारिक रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। पुलिस तकनीकी साक्ष्यों और कॉल डिटेल्स के आधार पर गिरोह का पता लगाने में जुटी है।
बिलासपुर पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल पर खुद को जांच एजेंसी या पुलिस अधिकारी बताने वाले व्यक्तियों के झांसे में न आएं। किसी भी दबाव में अपनी बैंकिंग जानकारी साझा न करें और न ही रुपये ट्रांसफर करें। साइबर ठगी की आशंका होने पर तुरंत स्थानीय पुलिस या हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें।
खबरें नहीं सच का प्रहार


No comments:
Post a Comment