संस्थान के संयुक्त निदेशक एवं SCSP कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. पंकज शर्मा ने किसानों को वर्तमान समय में धान की फसल में अपनाई जाने वाली प्रमुख सस्य क्रियाओं की जानकारी दी। उन्होंने फसल की नियमित निगरानी के महत्व पर प्रकाश डाला व कहा कि धान की प्रारंभिक अवस्था में कीट एवं रोगों की पहचान कर समय रहते उनका समेकित प्रबंधन किया जाए तो फसल की स्वस्थ वृद्धि के साथ बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। किसानों को फेरोमोन ट्रैप एवं ट्राइकोकार्ड के उपयोग की तकनीक भी विस्तार से समझाई गई।
इस अवसर पर डॉ. अनिल दीक्षित संयुक्त निदेशक ने धान की फसल में पाए जाने वाले विभिन्न प्रमुख खरपतवारों की पहचान, उनके प्रभाव तथा प्रभावी प्रबंधन उपायों के बारे में किसानों को व्यावहारिक जानकारी दी। उन्होंने किसानों को खेत में खरपतवारों की समय रहते पहचान कर वैज्ञानिक विधियों से नियंत्रण करने की सलाह दी।
कार्यक्रम के दौरान किसानों को सुरक्षित भंडारण की व्यावहारिक जानकारी देने के साथ लगभग 300 किसानों एवं किसान महिलाओं को स्टोरेज बिन का वितरण किया गया। यह पहल किसानों को अपनी कृषि उपज को नमी, कीट एवं अन्य भंडारण संबंधी क्षति से बचाने तथा कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने में सहायक होगी।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. के. सी. शर्मा, प्रधान वैज्ञानिक द्वारा किया गया। कार्यक्रम में संस्थान के वैज्ञानिकों, अधिकारियों एवं संबंधित गांवों के किसान प्रतिनिधियों की सक्रिय सहभागिता रही।
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