बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि जब एक मृत सरकारी कर्मचारी के एक से अधिक आश्रित बच्चे नौकरी के लिए दावा करते हैं, तो उम्र में बड़े बच्चे को वरीयता के आधार पर प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इस व्यवस्था के साथ अदालत ने मुंगेली जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) के उस पुराने आदेश को रद्द कर दिया, जिसके तहत छोटे बेटे को नियुक्ति दी गई थी।
मुंगेली डीईओ का आदेश निरस्त, 30 दिनों में पात्रता जांचने के निर्देश जस्टिस संजय के. अग्रवाल की एकल पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए मुंगेली डीईओ द्वारा जारी नियुक्ति आदेश को खारिज कर दिया। अदालत ने प्रकरण को वापस शिक्षा अधिकारी के पास भेजते हुए आदेश दिया है कि वे 30 दिनों के भीतर बड़े बेटे की पात्रता की विधिवत जांच करें और उसके दावे पर नियमानुसार विचार कर निर्णय लें।
दूसरी पत्नी की संतान वैध उत्तराधिकारी, पर चयन नियम स्पष्ट नहीं सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी माना कि कानूनन दूसरी पत्नी से जन्मा बच्चा भी आश्रित रोजगार लाभ पाने के लिए वैध उत्तराधिकारी होता है। हालांकि, मौजूदा राज्य सरकार के दिशा-निर्देशों में इस बात की स्पष्ट व्याख्या नहीं है कि जब कई भाई-बहन एक साथ दावा प्रस्तुत करें, तो चयन का आधार क्या होना चाहिए।
Background यह प्रकरण मुंगेली जिले के धर्मपुरा स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में पदस्थ रहे भृत्य ईश्वर सिंह क्षत्रिय से जुड़ा है, जिनका निधन 29 सितंबर 2016 को हुआ था। उनकी दो पत्नियां थीं। दिवंगत कर्मचारी की पहली पत्नी के 35 वर्षीय बेटे जितेंद्र सिंह क्षत्रिय और दूसरी पत्नी के बेटे राजकुमार—दोनों ने अनुकंपा नियुक्ति हेतु आवेदन किया था। 7 अगस्त 2019 को डीईओ ने छोटे बेटे राजकुमार को नियुक्ति दे दी, जिसके विरुद्ध बड़े बेटे जितेंद्र ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी।
न्यायालय ने अपने आदेश में पटना हाईकोर्ट (राज किशोर बनाम बिहार राज्य) और झारखंड हाईकोर्ट द्वारा पूर्व में स्थापित न्यायिक नजीरों का संदर्भ देते हुए यह सिद्धांत दोहराया कि अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति का अधिकार ज्येष्ठता (वरीयता) के क्रम में ही निर्धारित होना चाहिए।
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