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रायपुर, रायपुर स्थित राजीव भवन में शुक्रवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने राज्य की भाजपा सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। बढ़ती बिजली दरों, स्मार्ट मीटर और '400 यूनिट तक बिल हाफ' योजना बंद किए जाने के विरोध में पार्टी शनिवार, 1 अगस्त से पूरे छत्तीसगढ़ में चरणबद्ध आंदोलन शुरू कर रही है। दीपक बैज ने आरोप लगाया कि सरकार लगातार बिजली महंगी करके आम जनता पर आर्थिक बोझ डाल रही है। उन्होंने साफ किया कि जब तक बढ़ी हुई दरें वापस नहीं ली जातीं और स्मार्ट मीटर हटाए नहीं जाते, कांग्रेस का यह प्रदर्शन जारी रहेगा।


चार चरणों में होगा सड़कों पर संग्राम

कांग्रेस ने अपने इस प्रदेशव्यापी आंदोलन को चार मुख्य चरणों में बांटकर रणनीति तैयार की है:

  • पहला चरण (1 अगस्त): राज्य के सभी जिला मुख्यालयों में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर बढ़ी बिजली दरों का खुलकर विरोध किया जाएगा।

  • दूसरा चरण (2 अगस्त से दो महीने तक): कार्यकर्ता घर-घर जाकर जनता से स्मार्ट मीटर हटाने के मांग पत्र भरवाएंगे और व्यापक हस्ताक्षर अभियान चलाएंगे।

  • तीसरा चरण (दो महीने बाद): एकत्रित आवेदनों को लेकर प्रदेशभर के जिला बिजली कार्यालयों का घेराव किया जाएगा और विधिवत पावती ली जाएगी।

  • चौथा चरण: जिलों में ज्ञापन सौंपने के बाद कांग्रेस कार्यकर्ता मुख्यमंत्री निवास का घेराव करेंगे। मुख्यमंत्री के पास ही बिजली विभाग का प्रभार भी है।

पांचवीं बार बढ़ीं दरें, 31.23% तक महंगा हुआ बिल

पत्रकार वार्ता में पीसीसी चीफ ने आंकड़े पेश करते हुए बताया कि भाजपा सरकार बनने के बाद से अब तक कुल 31.23 प्रतिशत तक बिजली महंगी की जा चुकी है। अकेले जुलाई महीने में ही घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 30 से 50 पैसे, गैर-घरेलू के लिए 20 से 40 पैसे और कृषि पंपों पर 40 पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी की गई। यह सरकार का लगातार पांचवां इजाफा है। इसके अलावा 12 फीसदी विद्युत ईंधन अधिभार (एमपीपीएस) थोप दिए जाने से बिल तीन से चार गुना तक बढ़कर आ रहे हैं।

स्मार्ट मीटर और अनुबंध भार पर उठाए गंभीर सवाल

दीपक बैज ने आरोप लगाया कि प्रदेश में लगाए जा रहे स्मार्ट मीटर वास्तविक खपत से कहीं ज्यादा रीडिंग दर्ज कर रहे हैं। उपभोक्ताओं की बिना अनुमति के उनका अनुबंध भार (लोड) बढ़ाकर पेनाल्टी जोड़ी जा रही है। उन्होंने संसद में अप्रैल 2026 के दौरान केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर के दिए बयान का जिक्र करते हुए कहा कि जब केंद्र सरकार ने माना है कि prepaid smart meter अनिवार्य नहीं बल्कि पूरी तरह वैकल्पिक हैं, तो फिर छत्तीसगढ़ में इन्हें जबरन क्यों लगाया जा रहा है? उन्होंने उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु की तर्ज पर राज्य में भी स्मार्ट मीटर वापस लेने की मांग की।

कांग्रेस की तीन प्रमुख मांगें

  1. बिजली की बढ़ी हुई दरों को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए।

  2. भूपेश बघेल सरकार के समय जारी '400 यूनिट तक बिजली बिल हाफ' योजना फिर से शुरू हो।

  3. राज्यभर में जबरन लगाए जा रहे स्मार्ट मीटरों को तुरंत हटाया जाए।

कांग्रेस के इस आंदोलन के ऐलान के बाद से प्रदेश में सियासी हलचल तेज हो गई है। आंदोलन के पहले दिन सभी जिलों में पार्टी के बड़े नेता और पदाधिकारी मोर्चे की कमान संभालेंगे।

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