चार चरणों में होगा सड़कों पर संग्राम
कांग्रेस ने अपने इस प्रदेशव्यापी आंदोलन को चार मुख्य चरणों में बांटकर रणनीति तैयार की है:
पहला चरण (1 अगस्त): राज्य के सभी जिला मुख्यालयों में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर बढ़ी बिजली दरों का खुलकर विरोध किया जाएगा।
दूसरा चरण (2 अगस्त से दो महीने तक): कार्यकर्ता घर-घर जाकर जनता से स्मार्ट मीटर हटाने के मांग पत्र भरवाएंगे और व्यापक हस्ताक्षर अभियान चलाएंगे।
तीसरा चरण (दो महीने बाद): एकत्रित आवेदनों को लेकर प्रदेशभर के जिला बिजली कार्यालयों का घेराव किया जाएगा और विधिवत पावती ली जाएगी।
चौथा चरण: जिलों में ज्ञापन सौंपने के बाद कांग्रेस कार्यकर्ता मुख्यमंत्री निवास का घेराव करेंगे। मुख्यमंत्री के पास ही बिजली विभाग का प्रभार भी है।
पांचवीं बार बढ़ीं दरें, 31.23% तक महंगा हुआ बिल
पत्रकार वार्ता में पीसीसी चीफ ने आंकड़े पेश करते हुए बताया कि भाजपा सरकार बनने के बाद से अब तक कुल 31.23 प्रतिशत तक बिजली महंगी की जा चुकी है। अकेले जुलाई महीने में ही घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 30 से 50 पैसे, गैर-घरेलू के लिए 20 से 40 पैसे और कृषि पंपों पर 40 पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी की गई। यह सरकार का लगातार पांचवां इजाफा है। इसके अलावा 12 फीसदी विद्युत ईंधन अधिभार (एमपीपीएस) थोप दिए जाने से बिल तीन से चार गुना तक बढ़कर आ रहे हैं।
स्मार्ट मीटर और अनुबंध भार पर उठाए गंभीर सवाल
दीपक बैज ने आरोप लगाया कि प्रदेश में लगाए जा रहे स्मार्ट मीटर वास्तविक खपत से कहीं ज्यादा रीडिंग दर्ज कर रहे हैं। उपभोक्ताओं की बिना अनुमति के उनका अनुबंध भार (लोड) बढ़ाकर पेनाल्टी जोड़ी जा रही है। उन्होंने संसद में अप्रैल 2026 के दौरान केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर के दिए बयान का जिक्र करते हुए कहा कि जब केंद्र सरकार ने माना है कि prepaid smart meter अनिवार्य नहीं बल्कि पूरी तरह वैकल्पिक हैं, तो फिर छत्तीसगढ़ में इन्हें जबरन क्यों लगाया जा रहा है? उन्होंने उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु की तर्ज पर राज्य में भी स्मार्ट मीटर वापस लेने की मांग की।
कांग्रेस की तीन प्रमुख मांगें
बिजली की बढ़ी हुई दरों को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए।
भूपेश बघेल सरकार के समय जारी '400 यूनिट तक बिजली बिल हाफ' योजना फिर से शुरू हो।
राज्यभर में जबरन लगाए जा रहे स्मार्ट मीटरों को तुरंत हटाया जाए।
खबरें नहीं सच का प्रहार


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