बलरामपुर जिले में अवैध चिकित्सा गतिविधियों के खिलाफ जारी जांच अभियान में एक बड़ा खुलासा हुआ है। यहां एक सरकारी स्कूल में पदस्थ शिक्षक छुट्टी के बाद डॉक्टर बनकर मरीजों का इलाज करता पाया गया। आरोपी शिक्षक अपनी पत्नी के साथ मिलकर इलाके में दो अवैध क्लीनिकों का संचालन कर रहा था। संयुक्त प्रशासनिक टीम ने छापेमारी कर क्लीनिक को सील कर दिया है।
संयुक्त टीम की छापेमारी में हुआ भंडाफोड़
स्वास्थ्य विभाग, राजस्व और पुलिस प्रशासन की संयुक्त टीम ने बलरामपुर के दामोदरपुर क्षेत्र में संचालित संदिग्ध क्लीनिकों पर आकस्मिक दबिश दी। जांच के दौरान यह बात सामने आई कि पूर्व माध्यमिक शाला लुरघुट्टा में पदस्थ शिक्षक प्रदीप दास स्कूल समय समाप्त होने के बाद दामोदरपुर में अपनी पत्नी के साथ मिलकर दो अलग-अलग क्लीनिक चला रहा था।
एक्सपायरी दवाइयां और मेडिकल उपकरण बरामद
जांच दल ने जब क्लीनिक की तलाशी ली, तो वहां से भारी मात्रा में एक्सपायरी दवाइयां और कई प्रकार के मेडिकल उपकरण मिले। क्लीनिक संचालन से संबंधित वैध दस्तावेज और मेडिकल डिग्री प्रस्तुत न किए जाने पर टीम ने सारा सामान जब्त कर सील कर दिया। नर्सिंग होम एक्ट के प्रावधानों के उल्लंघन को लेकर भी आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू की गई है।
बलरामपुर जिले में एक झोलाछाप डॉक्टर के कथित गलत इलाज से तीन वर्षीय बच्चे की मौत की घटना सामने आई थी। इस घटना के बाद जिला प्रशासन ने पूरे जिले में अवैध रूप से चल रहे क्लीनिकों और गैर-पंजीकृत चिकित्सकों के खिलाफ सघन अभियान शुरू किया है। इसी जांच के तहत सरकारी शिक्षक द्वारा चलाए जा रहे इस अवैध नेटवर्क का खुलासा हुआ।
शिक्षा के पेशे से जुड़े व्यक्ति द्वारा बिना किसी वैध योग्यता के स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर लोगों की जान जोखिम में डालना एक गंभीर मामला है। प्रशासनिक टीम ने क्लीनिक को सील कर दिया है और मामले में नर्सिंग होम एक्ट के तहत आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।
खबरें नहीं सच का प्रहार


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