रायपुर। केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित स्वामी विवेकानंद विमानतुल (एयरपोर्ट) सहित देश के 11 प्रमुख हवाई अड्डों के संचालन को निजी हाथों में सौंपने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। टेंडर और बिडिंग की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उच्चतम बोली लगाने वाली निजी कंपनी को 50 वर्षों के लिए रायपुर एयरपोर्ट के संचालन और प्रबंधन की कमान सौंपी जाएगी। हालांकि, हवाई अड्डे की सुरक्षा और एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) की व्यवस्था पहले की तरह ही सरकारी एजेंसियों के अधीन रहेगी।
2028 से 50 वर्षों के लिए निजी हाथों में जाएगा संचालन
वर्तमान में रायपुर एयरपोर्ट का संपूर्ण प्रबंधन भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) द्वारा किया जा रहा है। तय योजना के तहत टेंडर, बिडिंग और हैंडओवर की संपूर्ण प्रक्रिया पूरी होने में लगभग दो वर्ष का समय लगेगा। इसके बाद वर्ष 2028 से अगले 50 वर्षों के लिए सफल बोलीदाता कंपनी को इसका संचालन लीज पर दिया जाएगा। इस व्यवस्था के एवज में केंद्र सरकार को संबंधित कंपनी से एक निश्चित राशि (फिक्स अमाउंट) प्राप्त होगी।
सुरक्षा और एयर ट्रैफिक कंट्रोल पर रहेगा अथॉरिटी का नियंत्रण
एयरपोर्ट का वाणिज्यिक और परिचालन प्रबंधन निजी हाथों में जाने के बाद भी प्रमुख संवेदनशील व्यवस्थाओं पर केंद्र सरकार का ही नियंत्रण रहेगा:
सुरक्षा व्यवस्था: हवाई अड्डे की आंतरिक और बाहरी सुरक्षा की जिम्मेदारी पूरी तरह से केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के जवानों के पास ही रहेगी। इसमें निजी ऑपरेटर का कोई हस्तक्षेप नहीं होगा।
एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC): विमानों के सुरक्षित आवागमन और एयर ट्रैफिक कंट्रोल का संचालन भी एयरपोर्ट अथॉरिटी के पास ही सुरक्षित रहेगा।
अंतरराष्ट्रीय उड़ानों और आधुनिकीकरण की उम्मीद, शुल्क में हो सकती है बढ़ोतरी
हवाई अड्डे के निजीकरण से यात्री सुविधाओं के विस्तार, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और रायपुर से सीधी अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शुरू होने की संभावनाएं मजबूत होंगी। निजी प्रबंधन राजस्व बढ़ाने के उद्देश्य से हवाई अड्डे की ब्रांडिंग और वैश्विक कनेक्टिविटी पर जोर देता है।
दूसरी ओर, पहले से निजीकृत हवाई अड्डों (जैसे मुंबई, जयपुर, लखनऊ और अहमदाबाद) के अनुभवों को देखते हुए यह अनुमान है कि परिचालन हस्तांतरण के बाद हवाई टिकट दरों, यूजर डेवलपमेंट फीस और पार्किंग शुल्कों में वृद्धि देखने को मिल सकती है।
बोली की दौड़ में कई दिग्गज कंपनियां, 5 समूहों में बांटे गए 11 एयरपोर्ट
रायपुर एयरपोर्ट के आधुनिक टर्मिनल भवन, बड़े रनवे और यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए कई बड़े औद्योगिक समूह बोली लगाने की तैयारी में हैं। इनमें अडानी एयरपोर्ट होल्डिंग्स, जीएमआर एयरपोर्ट्स, लार्सन एंड टुब्रो (L&T), जीवीके ग्रुप और आईआरबी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रमुख दावेदार माने जा रहे हैं।
सरकार ने निजीकरण के दायरे में शामिल 11 हवाई अड्डों को 5 समूहों में विभाजित किया है:
समूह 1: वाराणसी, गया और कुशीनगर
समूह 2: तिरुचिरापल्ली और तिरुपति
समूह 3: अमृतसर और कांगड़ा
समूह 4: भुवनेश्वर और हुबली
समूह 5: रायपुर और औरंगाबाद (छत्रपति संभाजीनगर)
रायपुर एयरपोर्ट का निजीकरण छत्तीसगढ़ के विमानन क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाओं और संभावित विदेशी उड़ानों से जोड़ने का मार्ग प्रशस्त करेगा। हालांकि, 50 वर्षों की इस लीज के दौरान यात्रियों को बेहतर सुविधाओं के साथ-साथ बढ़े हुए शुल्कों का सामना भी करना पड़ सकता है। सुरक्षा और एयर ट्रैफिक का नियंत्रण सरकार के पास बने रहना यात्रियों की सुरक्षा के लिहाज से एक महत्वपूर्ण कदम है।
FAQ
प्र. 1: रायपुर एयरपोर्ट का संचालन निजी कंपनी को कब तक सौंपा जाएगा?
उत्तर: टेंडर और हस्तांतरण की प्रक्रिया में लगभग दो वर्ष लगेंगे। इसके बाद वर्ष 2028 से अगले 50 वर्षों के लिए इसका संचालन निजी कंपनी को दिया जाएगा।
प्र. 2: क्या निजीकरण के बाद एयरपोर्ट की सुरक्षा निजी सुरक्षा गार्ड संभालेंगे?
उत्तर: नहीं। एयरपोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था पहले की तरह ही केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के पास रहेगी।
प्र. 3: रायपुर के अलावा किन अन्य हवाई अड्डों का निजीकरण हो रहा है?
उत्तर: रायपुर के साथ-साथ वाराणसी, गया, कुशीनगर, तिरुचिरापल्ली, तिरुपति, अमृतसर, कांगड़ा, भुवनेश्वर, हुबली और औरंगाबाद (छत्रपति संभाजीनगर) एयरपोर्ट शामिल हैं।
प्र. 4: निजीकरण से यात्रियों पर क्या प्रभाव पड़ सकता है?
उत्तर: यात्रियों को आधुनिक सुविधाएं और संभावित अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का लाभ मिल सकता है, लेकिन टिकट दरों और पार्किंग शुल्क में वृद्धि की संभावना भी बनी रहेगी।
खबरें नहीं सच का प्रहार


No comments:
Post a Comment