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धमतरी , किसी भी समाज की संवेदनशीलता और प्रगति का असली पैमाना यह है कि वह अपने सबसे कमजोर और जरूरतमंद वर्गों के साथ कैसे खड़ा होता है। छत्तीसगढ़ का धमतरी जिला इस कसौटी पर अपनी एक नई और मिसाली पहचान गढ़ रहा है। यहाँ समाज कल्याण विभाग की योजनाएं केवल कागजी आंकड़े नहीं, बल्कि जिले के 72 हजार 582 जरूरतमंदों, वरिष्ठ नागरिकों, विधवाओं, दिव्यांगजनों और तृतीय लिंग समुदाय के जीवन में आत्मनिर्भरता की नई सुबह बनकर उभरी हैं।

पेंशन योजनाओं से 48 हजार 858 हितग्राही लाभान्वित

बुढ़ापे की लाठी बनने से लेकर विपदा के समय संबल देने तक, पेंशन योजनाओं ने जिले के हजारों परिवारों के दैनिक जीवन को आसान बना दिया है। मुख्यमंत्री पेंशन योजना के 35 हजार 388 और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना के 13 हजार 470 हितग्राहियों के साथ-साथ सामाजिक सुरक्षा, सुखद सहारा, राष्ट्रीय विधवा और दिव्यांग पेंशन योजनाओं से जुड़े हजारों लोग हर महीने मिलने वाली आर्थिक सहायता से अपने छोटे-मोटे खर्चों के लिए किसी और पर निर्भर नहीं हैं।

10 हजार 232 दिव्यांगजनों को यूडीआईडी कार्ड से मिली ऐसी विशिष्ट पहचान

    धमतरी में दिव्यांगजनों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की पहल महज आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है। यहाँ उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का एक पूरा ताना-बाना बुना गया है। चालू वर्ष में 154 सहायक उपकरणों और 146 कृत्रिम अंगों का वितरण कर जहाँ दिव्यांगों के कदमों को गति दी गई, वहीं 622 विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति देकर उनकी शिक्षा की राह आसान बनाई गई है। उच्च शिक्षा और सिविल सेवा प्रोत्साहन योजनाओं के जरिए उनके सपनों को उड़ान मिल रही है, तो वहीं 5 जोड़ों को 2.50 लाख रुपये की विवाह प्रोत्साहन राशि देकर उनके नए जीवन की नींव रखी गई है। इतना ही नहीं, 10 हजार 232 दिव्यांगजनों को यूडीआईडी कार्ड देकर उन्हें एक ऐसी विशिष्ट पहचान सौंपी गई है, जिससे सरकारी योजनाओं का लाभ उन तक बिना किसी रुकावट के पहुँच रहा है।

राष्ट्रीय परिवार सहायता योजना के तहत 103 पीडि़त परिवारों को मदद

    किसी घर के मुख्य कमाऊ सदस्य का अचानक चले जाना परिवार को गहरे संकट में धकेल देता है। ऐसे कठिन वक्त में राष्ट्रीय परिवार सहायता योजना के तहत 103 पीडि़त परिवारों को 20.60 लाख रुपये की तत्काल मदद देकर धमतरी प्रशासन ने संवेदनशीलता की मिसाल पेश की है। इसके साथ ही, समाज के अंतिम छोर पर खड़े तृतीय लिंग समुदाय को पहचान और अधिकार दिलाने के लिए 43 व्यक्तियों को पहचान पत्र जारी किए गए हैं, जिससे उनके लिए शासकीय सेवाओं और सम्मानजनक जीवन के दरवाजे खुले हैं।

    धमतरी जिले का यह खाका केवल सरकारी बजट के खर्च की कहानी नहीं कहता, बल्कि यह उस बदलते सामाजिक परिदृश्य की तस्वीर है जहाँ हर नागरिक को सुरक्षा, सम्मान और समान अवसर की गारंटी मिल रही है।

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