रायपुर।, छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में बुनियादी शिक्षा की गुणवत्ता और विद्यार्थियों के भाषा कौशल (Language Skills) को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार बड़े बदलाव करने जा रही है। नई व्यवस्था के तहत प्राथमिक कक्षाओं में हिंदी और उच्च प्राथमिक कक्षाओं में अंग्रेजी बोलने व लिखने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके साथ ही प्रदेश के स्कूलों में 10,000 शिक्षकों की भर्ती की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है।
भाषा कौशल पर विशेष जोर, शिक्षकों को मिलेगी स्पेशल ट्रेनिंग
स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के अनुसार, पहली से आठवीं कक्षा तक बच्चों को आसानी से पास करने की पुरानी व्यवस्था का असर उनकी पढ़ने-लिखने की क्षमता पर पड़ा है। इस स्थिति को सुधारने के लिए अब ठोस कदम उठाए जा रहे हैं:
कक्षा 1 से 5वीं: बच्चों को हिंदी भाषा में धाराप्रवाह बोलने और लिखने में सक्षम बनाया जाएगा।
कक्षा 6 से 8वीं: विद्यार्थियों के लिए अंग्रेजी बोलने और लिखने पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
शिक्षकों को बच्चों को बेहतर ढंग से अंग्रेजी पढ़ाने के लिए पहले विशेष प्रशिक्षण (Special Training) दिया जाएगा। यदि किसी स्कूल में बच्चे निर्धारित स्तर तक भाषा कौशल हासिल नहीं कर पाते हैं, तो संबंधित शिक्षकों की जवाबदेही तय की जाएगी और आवश्यक कार्रवाई भी हो सकती है।
10 हजार शिक्षकों की भर्ती और ऑनलाइन उपस्थिति का असर
प्रदेश की शैक्षणिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए बड़े पैमाने पर शिक्षकों की तैनाती की जा रही है:
5,000 संविदा शिक्षक: स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम स्कूलों को मजबूत करने के लिए 5,000 संविदा शिक्षकों की भर्ती की जाएगी। इनका चयन ऑनलाइन परीक्षा के माध्यम से होगा।
5,000 नियमित शिक्षक: 5,000 नियमित शिक्षकों की भर्ती के लिए विज्ञापन पहले ही जारी किया जा चुका है।
राज्य के सरकारी स्कूलों में प्रशासनिक व अन्य कार्यालयों में संलग्न (Attached) अध्यापकों की वजह से पठन-पाठन प्रभावित हो रहा था। हाल ही में लागू की गई ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था के बाद विभिन्न दफ्तरों से 10,600 शिक्षक वापस अपने मूल स्कूलों में लौट आए हैं। वर्तमान में प्रदेश भर के लगभग 85 प्रतिशत शिक्षक नियमित रूप से ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं, जिससे स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति और शैक्षणिक माहौल में सुधार हुआ है।
शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति, गैर-शैक्षणिक कार्यों में संलग्न अध्यापकों की स्कूलों में वापसी और बड़े पैमाने पर नई भर्तियों के साथ भाषा शिक्षण पर ध्यान केंद्रित करने की यह पहल छत्तीसगढ़ की सरकारी स्कूली शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक और दूरगामी बदलाव ला सकती है।
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