बिलासपुर (खबर प्रहार न्यूज़ नेटवर्क)। जिले में शिक्षा विभाग के भीतर नियमों को ताक पर रखकर चहेते शिक्षकों और कर्मचारियों को अटैचमेंट के नाम पर बचाने का खेल बदस्तूर जारी है। लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) के सख्त निर्देशों और एक के बाद एक जारी 5 सरकारी पत्रों के बावजूद बिलासपुर में अवैध अटैचमेंट पूरी तरह खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है।
इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात अधिकारियों का ढुलमुल रवैया और मौन है। जहाँ एक ओर संयुक्त संचालक (JD) अश्वनी भारद्वाज इस मामले में अनभिज्ञता जता रहे हैं, वहीं प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) अजय कौशिक कैमरे और सवालों के सामने पूरी तरह चुप्पी साधे हुए हैं। अधिकारियों के इस रवैये से साफ जाहिर होता है कि विभाग के भीतर रसूखदार शिक्षकों को बचाने का खेल पर्दे के पीछे कितनी मजबूती से चल रहा है।
DPI के 5 पत्रों के बाद भी नहीं हिली व्यवस्था
शासन के कड़े आदेशों के बाद DPI ने लगातार 12 जून, 17 जून, 25 जून और 7 जुलाई को सिलसिलेवार पत्र जारी कर अटैचमेंट खत्म करने का आदेश दिया था। शुरुआती सख्ती के बाद सहायक संचालक वर्षा शर्मा ने 15 शिक्षकों व कर्मचारियों को रिलीव किया, जिसके बाद प्रभारी DEO अजय कौशिक ने 38 कर्मियों को उनके मूल पदस्थापना स्थल के लिए रिलीव किया। लेकिन इसके बाद प्रक्रिया अचानक ठप पड़ गई।
विधायक कार्यालयों से लेकर छात्रावासों तक में जमे हैं 'लाडले'
सुत्रों व प्राप्त जानकारी के अनुसार, वर्तमान में भी दर्जनों शिक्षक व कर्मचारी छात्रावासों, विभिन्न शासकीय कार्यालयों, बीआरसी (BRC) और यहाँ तक कि विधायकों के निज सहायक कार्यालयों में नियमविरुद्ध तरीके से अटैच हैं।
नियम का पालन करने वाले शिक्षकों में भारी असंतोष
विभाग की इस दोहरी नीति से उन शिक्षकों और कर्मचारियों में गहरा असंतोष व्याप्त है, जिन्हें आदेश मिलते ही ईमानदारी से उनके मूल विद्यालयों में वापस भेज दिया गया। असंतुष्ट कर्मचारियों का कहना है कि जो रसूखदार हैं वे आज भी सुगम स्थानों पर अटैच हैं, जबकि नियम का पालन करने वालों के साथ भेदभाव किया जा रहा है। मजबूरी के कारण वे खुलकर शिकायत भी नहीं कर पा रहे हैं।
बीईओ कार्यालय में जमे कर्मचारी, लेन-देन की जोरदार चर्चा
मामला केवल शिक्षकों तक सीमित नहीं है। बिल्हा ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (BEO) कार्यालय में तरुण कर्ष नामक कर्मचारी लंबे समय से जमे हुए हैं, जिन्हें 'कर्मचारियों की कमी' का बहाना बनाकर रिलीव नहीं किया गया। इसी तरह दो बीआरसी (BRC) का अटैचमेंट भी खत्म नहीं किया गया है। विभाग के गलियारों में चर्चा है कि वेतन रुकवाने, सर्विस बुक अपडेट करवाने और अटैचमेंट बरकरार रखने/खत्म न करने के एवज में भारी लेन-देन का खेल चल रहा है।
अधिकारियों के बोल और चुप्पी:
अश्वनी भारद्वाज (संयुक्त संचालक - JD):
"जब भी शिक्षकों को रिलीव किया जाता है, तो उसकी प्रतिलिपि (Copy) हमारे पास आती है। लेकिन शेष बचे हुए शिक्षकों या कर्मचारियों के रिलीव किए जाने संबंधी कोई जानकारी फिलहाल विभाग से प्राप्त नहीं हुई है। कितने कर्मचारी अभी रिलीव होने से बचे हैं, इसकी सटीक जानकारी प्रभारी DEO ही दे सकते हैं।"
अजय कौशिक (प्रभारी DEO, बिलासपुर):
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रभारी DEO इस विषय पर कुछ भी बोलने से साफ बचते नजर आ रहे हैं और उन्होंने इस पूरे मामले पर चुप्पी साध रखी है।
'खबर प्रहार' का सीधा सवाल:
जब शासन और DPI का सख्त आदेश है, तो बिलासपुर शिक्षा विभाग में किसके शह पर बचे हुए शिक्षकों का अटैचमेंट खत्म नहीं किया जा रहा?
क्या रसूखदार और पहुंच वाले कर्मचारियों के लिए शिक्षा विभाग में अलग कानून चलता है?
आखिर प्रभारी DEO इस मामले में मीडिया के सवालों से क्यों भाग रहे हैं?
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