नई सूची में बंटे परिवार और होने वाली दुल्हनें शामिल
तैयार की जा रही नई सूची में केवल होने वाली दुल्हनें ही नहीं, बल्कि उनके रिश्तेदार और विभाजन के बाद दोनों देशों में बंटे हुए परिवारों के सदस्य भी शामिल हैं। इनमें सिंधी हिंदू समाज के साथ-साथ गुजराती, मारवाड़ी, सरायकी और अन्य हिंदू समुदायों के लोग सम्मिलित हैं।
सूची को अंतिम रूप देने के बाद इसे जल्द ही केंद्रीय गृह मंत्रालय को औपचारिक रूप से सौंपा जाएगा ताकि विशेष वीजा की प्रक्रिया शुरू हो सके।
रायपुर शदाणी दरबार का नेतृत्व
रायपुर स्थित शदाणी दरबार के सचिव उदयलाल शदाणी के अनुसार, पाकिस्तान के सिंध प्रांत में भी शदाणी दरबार का केंद्र है। शदाणी दरबार के नौवें पीठाधीश संत युधिष्ठिरलाल (जो 1968 से रायपुर में निवासरत हैं) के प्रयासों से पहले चरण में 150 दुल्हनों के लिए वीजा स्वीकृत कराया गया था।
संत युधिष्ठिरलाल ने बताया कि विभाजन के दशकों बाद भी कई परिवार दोनों मुल्कों में अलग-थलग पड़े हैं, जिन्हें दोबारा मिलाने के उद्देश्य से यह पहल की जा रही है।
तीसरे देशों के वैकल्पिक मार्गों से आवागमन
अटारी-वाघा सीमा मार्ग बंद होने की वजह से सीधे भारत आना वर्तमान में संभव नहीं है। पूर्व में अप्रैल से जून के बीच भारत पहुंची 150 दुल्हनों को मस्कट, ढाका, कोलंबो, दुबई और कतर जैसे तीसरे देशों के हवाई मार्गों का सहारा लेना पड़ा था। सीमाएं दोबारा खुलने तक नई सूची में शामिल लोगों को भी इन्हीं वैकल्पिक मार्गों से भारत लाया जाएगा।
'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद दोनों देशों के बीच सीमा पार आवाजाही पूरी तरह बाधित हो गई थी। इसका सीधा असर उन हिंदू परिवारों पर पड़ा जिनके रिश्ते सीमा पार तय हुए थे या जिनके पारिवारिक सदस्य दोनों देशों में बंटे हुए थे। शदाणी दरबार और गृह मंत्रालय के संयुक्त समन्वय से अप्रैल से जून माह के दौरान पहले जत्थे में 150 दुल्हनों को सुरक्षित भारत लाकर उनके परिवारों से मिलाया गया था।
शदाणी दरबार की यह नई पहल सरहद के दोनों ओर फंसे परिवारों के बीच एक मजबूत मानवीय सेतु का काम कर रही है। अब सभी की निगाहें केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा नई सूची पर दी जाने वाली मंजूरी और वीजा प्रक्रिया पर टिकी हैं।
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