दोनों राज्यों की सरकारों ने सीमावर्ती व तटीय जिलों के जिलाधिकारियों को 24x7 अलर्ट मोड पर रहने का निर्देश दिया है। राहत एवं बचाव कार्यों के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) की टीमों को संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात कर दिया गया है।
उत्तर प्रदेश: प्रयागराज और वाराणसी में घाट जलमग्न, नौका संचालन ठप
उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल और तराई क्षेत्रों में नदियां विकराल रूप धारण कर रही हैं:
प्रयागराज में संगम की स्थिति: गंगा और यमुना दोनों के जलस्तर में प्रति घंटे 2 से 3 सेंटीमीटर की रफ्तार से बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। संगम तट पूरी तरह जलमग्न हो चुका है और लेटे हुए हनुमान मंदिर के निचले परिसर के करीब पानी पहुंच गया है। सुरक्षा के मद्देनजर प्रशासन ने संगम क्षेत्र में स्नान और नौका संचालन पर रोक लगा दी है।
वाराणसी के घाटों का संपर्क टूटा: काशी में गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु के करीब पहुंच गया है। दशाश्वमेध, मणिकर्णिका और अस्सी घाट समेत 84 घाटों का आपसी संपर्क टूट चुका है। दैनिक गंगा आरती को अब घाट की ऊपरी सीढ़ियों और छतों पर शिफ्ट किया गया है।
तटवर्ती गांवों में पानी का प्रवेश: मिर्जापुर, गाजीपुर, बलिया और लखीमपुर खीरी के दर्जनों निचले गांवों में बाढ़ का पानी घुस चुका है। राजस्व विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, 16 हजार से अधिक प्रभावित ग्रामीणों को ऊंचे स्थानों और राहत शिविरों में शिफ्ट किया गया है।
बिहार: सोन बैराज के सभी 69 गेट खुले, कोसी और गंडक का भी रौद्र रूप
बिहार में स्थिति दोहरी मार जैसी है—नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में हो रही बारिश और मध्य भारत से आने वाले पानी के चलते सीमावर्ती और मध्य बिहार के जिले जलमग्न होने की कगार पर हैं:
इंद्रपुरी (सोन) बैराज के खुले फाटक: सोन नदी के बढ़ते दबाव को नियंत्रित करने के लिए रोहतास के इंद्रपुरी बैराज के सभी 69 फाटकों को खोल दिया गया है। बैराज से लाखों क्यूसेक पानी डिस्चार्ज होने के बाद भोजपुर, पटना और अरवल के दियारा इलाकों में अलर्ट जारी किया गया है।
पटना के दियारा में दहशत: राजधानी पटना के दानापुर, मनेर और फतुहा के तटीय इलाकों में पानी फैलने लगा है। किसानों की सैकड़ों एकड़ खरीफ फसलें और सब्जियां पानी में डूब गई हैं।
उत्तर बिहार की स्थिति: सुपौल, सहरसा और खगड़िया में कोसी और बागमती के कटाव से कई तटबंधों पर दबाव बना हुआ है। जल संसाधन विभाग की तकनीकी टीमें चौबीसों घंटे बांधों की निगरानी कर रही हैं।
स्वास्थ्य एवं राहत व्यवस्था: प्रशासन के कड़े निर्देश
आपदा प्रबंधन विभाग ने प्रभावित जिलों में महामारी की रोकथाम के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की है:
मेडिकल रिलीफ कैंप: बाढ़ प्रभावित गांवों में मेडिकल किट्स, क्लोरीन की गोलियां, ओआरएस और एंटी-वेनम (सांप के काटने की दवाएं) की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।
ड्राई राशन वितरण: विस्थापित परिवारों के लिए राहत शिविरों में सूखा राशन, शुद्ध पेयजल और बच्चों के लिए दूध की व्यवस्था शुरू कर दी गई है।
पशुओं के लिए चारा डिपो: मवेशियों की सुरक्षा के लिए ऊंचे स्थानों पर अस्थायी पशु शेल्टर और चारे का इंतजाम किया जा रहा है।
मौसम विभाग (IMD) की आगामी चेतावनी
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, मॉनसून ट्रफ वर्तमान में उत्तर भारत के मैदानी इलाकों से होकर गुजर रही है, साथ ही एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन भी सक्रिय है। इसके प्रभाव से अगले 48 से 72 घंटों के दौरान पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार और उत्तराखंड के कुछ हिस्सों में मध्यम से भारी बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना है।
प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे उफनती नदियों के किनारों, पुराने पुलों और जलजमाव वाले निचले इलाकों में जाने से बचें और किसी भी आपात स्थिति में स्थानीय कंट्रोल रूम से तुरंत संपर्क करें।
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