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नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौते के बाद फिलिस्तीन के भारत में राजदूत अब्दुल्ला अबू शावेश ने भारत के साथ अपने देश के मजबूत और ऐतिहासिक संबंधों पर जोर दिया है। न्यूज एजेंसी एएनआई को दिए एक विशेष इंटरव्यू में राजदूत ने कहा कि भारत अपनी पारंपरिक स्थिति को बनाए रखेगा।

भारत को बताया बड़ा भाई

अब्दुल्ला अबू शावेश ने भारत को फिलिस्तीन का बड़ा भाई करार दिया। उन्होंने 1947 में महात्मा गांधी के नेतृत्व में भारत द्वारा फिलिस्तीन विभाजन योजना के खिलाफ दिए गए वोट का जिक्र किया। राजदूत ने कहा कि भारत ने उस समय स्पष्ट रूप से कहा था कि “फिलिस्तीन अरबों का है और फिलिस्तीन के लोगों का है”, ठीक उसी तरह जैसे यूनाइटेड किंगडम ब्रिटेन के लोगों का है।

उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में लगभग 10 साल तक काम करने का अपना अनुभव साझा करते हुए भारतीय राजनयिकों की प्रशंसा की और कहा कि उन्हें भारतीय राजनयिक होने का सही मायने पता है।

पीएम मोदी की सराहना

राजदूत अब्दुल्ला अबू शावेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के 12 वर्ष पूरे होने पर उनकी सराहना की। उन्होंने पीएम मोदी को देश का सबसे लंबे समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री बताते हुए कहा कि भारत के लोगों को इतने महान नेता मिलने पर बधाई के पात्र हैं।

उन्होंने विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत फिलिस्तीन के प्रति अपनी ऐतिहासिक स्थिति को आगे भी कायम रखेगा।

भारत की संतुलित फिलिस्तीन नीति

भारत लंबे समय से इजरायल को एक भरोसेमंद दोस्त और मजबूत रक्षा साझेदार मानता आया है। वहीं फिलिस्तीन के साथ भी भारत के संबंध हमेशा सौहार्दपूर्ण रहे हैं।

भारत ने दोनों पक्षों के बीच हमेशा संतुलित कूटनीति अपनाई है। राजदूत ने भारत की इस नीति की सराहना की कि वह बातचीत के जरिए दो-राष्ट्र समाधान का समर्थन करता है। इसमें एक संप्रभु, स्वतंत्र और व्यावहारिक फिलिस्तीन राज्य की स्थापना शामिल है।

भारत ने हमेशा यह भी जोर दिया है कि फिलिस्तीन को सुरक्षित और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सीमाओं के साथ इजरायल के साथ शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व मिलना चाहिए।

यह नीति भारत की पश्चिम एशिया कूटनीति का आधार स्तंभ रही है, जिसे भारत ने सभी प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दोहराया है।

आगे की राह

फिलिस्तीन के राजदूत के बयान से साफ है कि ईरान-अमेरिका शांति समझौते के बाद भी भारत की संतुलित विदेश नीति पर फिलिस्तीन को पूरा भरोसा है। दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में यह बयान महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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