देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) और गाजियाबाद क्राइम ब्रांच की संयुक्त टीम ने बुधवार को एक बड़ी कार्रवाई की है। टीम ने परवाल क्षेत्र में अवैध रूप से चल रही एक फर्जी दवा निर्माण इकाई पर छापा मारकर उसका भंडाफोड़ किया। मौके से देश की 12 दिग्गज फार्मा कंपनियों के नाम पर तैयार की जा रही भारी मात्रा में जाली दवाएं जब्त की गई हैं। नकली दवाओं के अवैध कारोबार पर इसे पुलिस प्रशासन का बड़ा प्रहार माना जा रहा है।
सटीक सूचना के आधार पर संयुक्त टीम ने देवीपुर न्यू हाईवे रोड स्थित एक परिसर की घेराबंदी कर दबिश दी। तलाशी के दौरान पता चला कि बिना किसी लाइसेंस या सरकारी अनुमति के यहाँ बड़े स्तर पर संदिग्ध दवाएं बनाई और पैक की जा रही थीं।
12 नामी कंपनियों के ब्रांड नेम का हो रहा था दुरुपयोग
जांच में सामने आया कि आरोपी देश के नामचीन ब्रांड्स के भरोसे का फायदा उठा रहे थे। मौके पर मिली पैकेजिंग सामग्री और रैपर्स पर सिप्ला, ल्यूपिन, सन फार्मा, डॉ. रेड्डीज, मैनकाइंड, एबॉट, इंटास, एरिस्टो, जाइडस, मैक्लियोड्स, एल्डर और माइक्रो जैसी 12 नामी कंपनियों के नाम और ट्रेडमार्क छपे हुए थे। इन फर्जी ब्रांडेड दवाओं को असली बताकर बाजार में खपाने की पूरी तैयारी थी।
मशीनें, फर्जी रैपर और संदिग्ध गोलियां जब्त
फैक्ट्री के अंदर से अधिकारियों ने ऑटोमैटिक पैकिंग मशीनें, तैयार संदिग्ध गोलियां, सिरप, खाली कैप्सूल और भारी मात्रा में छपे हुए नकली लेबल बरामद किए। पैकेजिंग की फिनिशिंग इतनी बारीक थी कि आम मरीज या केमिस्ट भी असली और नकली का फर्क आसानी से नहीं समझ पाता। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की गुणवत्ताहीन और घटिया दवाएं मरीजों की जान के साथ सीधा खिलवाड़ हैं।
लैब भेजी गईं दवाएं, सख्त कानूनी कार्रवाई की तैयारी
कार्रवाई के दौरान बरामद सभी सामग्रियों और दवाइयों को सील कर दिया गया है। नमूनों को सरकारी लेबोरेटरी में जांच के लिए भेजा गया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि लैब रिपोर्ट प्राप्त होते ही आरोपियों के खिलाफ ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट की संगीन धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया जाएगा। फिलहाल इस पूरे गिरोह के नेटवर्क से जुड़े अन्य तारों को तलाशने में पुलिस जुटी हुई है।
खबरें नहीं सच का प्रहार



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