उद्यान विभाग बिलासपुर के उप-संचालक डॉ. कमलेश दीवान के मुताबिक, किसान अपनी सुविधा के अनुसार अलग-अलग साइज और तकनीक के पॉलीहाउस चुन सकते हैं। शासन का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक खेती के साथ-साथ संरक्षित खेती को प्रोत्साहित करना है ताकि किसानों की आय में बढ़ोतरी हो सके।
दो तरह के सिस्टम और सब्सिडी का तरीका
इस योजना के अंतर्गत किसानों के पास दो विकल्प मौजूद हैं। वे चाहें तो 'नैचुरल वेंटिलेटेड पॉलीहाउस' बनवा सकते हैं या फिर 'फैन एंड पैड सिस्टम वेंटिलेटेड पॉलीहाउस' का चयन कर सकते हैं। दोनों ही मॉडल पर नियमानुसार 50 फीसदी तक छूट का प्रावधान है।
योजना का फायदा उठाने के लिए किसान को शुरुआत में अपने पैसों से पॉलीहाउस तैयार कराना होगा। काम पूरा होने के बाद निर्माण से जुड़े सभी बिल और जरूरी कागजात विभाग के पास जमा करने होंगे। विभागीय अधिकारियों द्वारा भौतिक सत्यापन (जांच) और स्वीकृति मिलने के बाद सब्सिडी का पैसा सीधे लाभार्थी किसान के बैंक खाते में भेज दिया जाएगा।
जरूरी दस्तावेज और 'पहले आओ, पहले पाओ' नियम
आवेदन के लिए किसानों को कुछ जरूरी कागजात तैयार रखने होंगे। इनमें मुख्य रूप से जमीन का नक्शा, खसरा, बी-1 की प्रति, पहचान के लिए आधार कार्ड और बैंक पासबुक की डिटेल शामिल है। इन सभी दस्तावेजों की स्क्रूटनी के बाद ही पात्रता तय होगी।
यह योजना सीमित समय और लक्ष्य के लिए है, इसलिए 'पहले आओ, पहले पाओ' के आधार पर लाभ बांटा जा रहा है। इच्छुक किसान बिना देर किए अपने ब्लॉक (विकासखंड) स्थित उद्यानिकी कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं और आवेदन प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।
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