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बलौदाबाजार,बीमा कंपनी द्वारा प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के अंतर्गत मृतक पति की बीमा क्षतिपूर्ति की राशि प्रदाय नहीं किये जाने के मामले में उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग बलौदाबाजार द्वारा बीमा कंपनी को सेवा में कमी का दोषी मानते हुए बीमा योजना के तहत बीमा क्षतिपूर्ति राशि 200000 एवं उपभोक्ता को मानसिक व आर्थिक क्षतिपूर्ति हेतु राशि 15000 तथा बाद-व्यय हेतु 7000 रुपये परिवादिनी को प्रदाय किये जाने का आदेश पारित किया गया।

प्राप्त जानकारी के अनुुसार कसडोल विकासखण्ड के ग्राम सारसडोल देवतराई निवासी परिवादिनी मीना परधी के पति स्व. जम्हर सिंह का छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक कसडोल में खाता था जिससे मृतक जम्हर सिंह द्वारा प्रीमियम राशि देकर विरोधी पक्षकार नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड रायपुर से प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना पालिसी लिया था दुर्घटना में जम्हर सिंह की मृत्यु होने पर मृतक की पत्नी एवं पालिसी की नामिनी परिवादिनी मौना परधी द्वारा मृतक पति की बीमा क्षतिपूर्ति की राशि प्राप्त करने बाबत बीमा कंपनी के कार्यालय में बीमा दावा प्रस्तुत किया गया।बीमा कंपनी द्वारा बीमा दावा निरस्त कर दिया गया जिससे परिवेदित होकर परिवादिनी द्वारा जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग बलौदाबाजार में परिवाद प्रस्तुत किया गया।

आयोग के अध्यक्ष रंजना दत्ता एवं सदस्यगण हरजीत सिंह चांवला व शारदा सोनी ने पेश दस्तावेजों एवं संबंधित नियम आदि का सूक्ष्मता से अध्ययन कर पाया कि बीमा कंपनी द्वारा बीमा दावा निरस्त करने का मूल आधार लिया गया है कि मृतक नशे की हालत में तेजी से लापरवाहीपूर्वक मोटर सायकल चलाते हुये स्वयं दुर्घटना कारित किया है एवं उसके पास वैध व प्रभावी ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था। विरोधी पक्षकार का उक्त तर्क मान्य योग्य नहीं है क्योंकि प्रस्तुत प्रकरण में विरोधी पक्षकार द्वारा बीमा दावा का निर्धारण करने हेतु कौन कौन से दस्तावेज की माँग परिवादिनी से की गई है उस सम्बन्ध में कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं है। दावा निरस्त किये जाने की सूचना संबंधित दस्तावेज में भी मृतक के ड्रायविंग लाइसेंस के अभाव में दावा निरस्त किये जाने का उल्लेख नही है। शव परीक्षण प्रतिवेदन में सिर्फ इस बात का उल्लेख है कि मृतक के पेट में अल्कोहल मौजूद था किन्तु अल्कोहल की मात्रा के संबंध में कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं है।  इसके अलावा पुलिस जांच में भी मृतक की लापरवाही के कारण दुर्घटना होना साबित नहीं हुआ है।ऐसी स्थिति में विरोधी पक्षकार बीमा कंपनी सिर्फ पेट में अल्कोहल की गंध होने से विपरीत उपधारणा बनाते हुये मृतक के शराब के नशे में होना मान्य करते हुये बीमा दावा निरस्त नहीं कर सकती। विरोधी पक्षकार नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड रायपुर को सेवा में कमी का दोषी मानते हुए बीमा योजना के तहत बीमा क्षतिपूर्ति राशि 200000 एवं उपभोक्ता को मानसिक व आर्थिक क्षतिपूर्ति हेतु राशि 15000 तथा वाद-व्यय-हेतु 7000 रूपये परिवादिनी को आदेश दिनांक से 45 दिवस के भीतर प्रदाय किये जाने का आदेश पारित किया गया।

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