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 रायगढ़, छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में इस बार मानसून की बेरुखी ने अन्नदाताओं की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। पड़ोसी जिलों में जहाँ झमाझम बारिश से खेत लबालब हैं, वहीं रायगढ़ के किसान खेतों में जरूरी नमी के लिए तरस रहे हैं। पर्याप्त पानी न बरसने के कारण खरीफ सीजन की मुख्य फसलों की बुआई और खेतों को तैयार करने का काम बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

भू-अभिलेख शाखा से मिले आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 1 जून से लेकर 18 जुलाई तक पूरे रायगढ़ जिले में महज 280.3 मिमी औसत वर्षा दर्ज की गई है। वहीं, बीते 24 घंटों की बात करें तो जिले में सिर्फ 12.5 मिमी औसत बारिश हुई।

तहसीलों में बारिश का असमान वितरण

इस मानसून सीजन में जिले के अलग-अलग इलाकों में बारिश का असंतुलन साफ देखने को मिल रहा है। कहीं स्थिति थोड़ी बेहतर है, तो कहीं सूखा जैसी नौबत आ गई है।

तहसीलवार बारिश के आंकड़े इस प्रकार हैं:

  • रायगढ़: 384.9 मिमी

  • तमनार: 373.4 मिमी

  • लैलूंगा: 291.6 मिमी

  • पुसौर: 256.2 मिमी

  • खरसिया: 249.0 मिमी

  • घरघोड़ा: 173.8 मिमी

इसके अलावा धरमजयगढ़, छाल और मुकडेगा जैसे क्षेत्रों में भी मानसून की रफ्तार बेहद धीमी रही है। यहाँ बारिश का ग्राफ उम्मीद से काफी नीचे दर्ज किया गया है।

नमी की कमी से खरीफ सीजन पड़ा धीमा

धान समेत तमाम खरीफ फसलों के बेहतर उत्पादन के लिए शुरुआती दौर में खेतों में अच्छी नमी का होना अनिवार्य है। रायगढ़ के स्थानीय किसानों का कहना है कि खेतों में पानी नहीं टिकने के कारण उन्होंने फिलहाल बुआई का काम आगे बढ़ा दिया है।

खेती-किसानी के जानकारों के मुताबिक, जून और जुलाई का महीना फसलों की नींव रखने के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है। इस दौरान अगर दो से तीन बार लगातार अच्छी बारिश नहीं होती, तो पौधों के अंकुरण और विकास पर सीधा बुरा असर पड़ता है।

मौसम विभाग के पूर्वानुमान पर टिकी निगाहें

बारिश की इस अनिश्चितता ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। वर्तमान में हालात यह हैं कि किसान अपने ट्रैक्टर और हल रोककर मौसम विभाग के अगले बुलेटिन और पूर्वानुमान पर नजरें जमाए हुए हैं। क्षेत्र के किसानों को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में मानसून दोबारा सक्रिय होगा, जिससे खेतों में पर्याप्त पानी इकट्ठा हो सकेगा और खरीफ सीजन के लंबित कार्यों में तेजी आएगी।

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