सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के एजेंडे पर आगे बढ़ रही मोदी सरकार का यह कदम देश की सियासत को गरमा सकता है। दरअसल, विपक्ष के पुराने रुख को देखते हुए संसद में इस मुद्दे पर तीखी बहस और टकराव होने के पूरे आसार हैं।
राष्ट्रीय गीत को मिलेगा राष्ट्रगान जैसा कानूनी संरक्षण
केंद्रीय कैबिनेट ने इस संशोधन प्रस्ताव को पहले ही हरी झंडी दे दी है। नए बदलावों के बाद अब वंदे मातरम को भी राष्ट्रीय ध्वज, संविधान और राष्ट्रगान (जन गण मन) की तरह ही कानूनी सुरक्षा मिलेगी। इसके साथ ही गृह मंत्रालय ने सभी राज्य सरकारों के लिए एक नया निर्देश भी जारी किया है। अब उन सभी सरकारी आयोजनों में राष्ट्रीय गीत (वंदे मातरम) का गायन अनिवार्य होगा, जहां राष्ट्रगान गाया जाता है।
गौरतलब है कि सरकार यह कदम ऐसे समय में उठा रही है, जब देश राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम की 150वीं जयंती मना रहा है और केंद्र इसके लिए साल भर के कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार कर चुका है।
बंगाल चुनाव और तुष्टिकरण की राजनीति पर वार
वंदे मातरम को लेकर देश में वैचारिक और राजनीतिक विवाद काफी पुराना है। चूंकि इसके रचयिता बंकिम चंद्र चटर्जी बंगाल से थे, इसलिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इसे सीधे तौर पर बंगाल की अस्मिता से जोड़ दिया है। विधानसभा चुनावों के समीकरणों को देखते हुए तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) खुलकर तो इसका विरोध नहीं कर पाई, लेकिन देश के कई हिस्सों से ऐसी घटनाएं सामने आती रही हैं जहां कथित सेक्युलर राजनीति करने वाले नेता इसके गायन से बचते हैं या इसे सांप्रदायिक रंग देते हैं।
दूसरी तरफ, भाजपा का आरोप है कि विपक्षी दलों ने तुष्टिकरण की राजनीति के चलते हमेशा राष्ट्रीय गीत की उपेक्षा की और इसके मूल स्वरूप के साथ काट-छांट की।
सोमवार को राज्यसभा में पेश होगा विधेयक
इस संवेदनशील राजनीतिक माहौल के बीच, सोमवार को उच्च सदन (राज्यसभा) की कार्यसूची में इस विधेयक को शामिल किया गया है। गृह मंत्री अमित शाह इसे सदन पटल पर रखेंगे। राज्यसभा से मंजूरी मिलने के बाद इस विधेयक को पारित कराने के लिए लोकसभा में भेजा जाएगा।
खबरें नहीं सच का प्रहार


No comments:
Post a Comment