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केंद्र सरकार ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) को सुचारू बनाने और राशन की गुणवत्ता सुधारने के लिए नया फरमान जारी किया है। इस फैसले ने देशभर के राइस मिलरों की चिंता बढ़ा दी है। सरकार ने पीडीएस के तहत जमा होने वाले अरवा और उसना चावल में 'ब्रोकन राइस' यानी कनकी की तय सीमा में भारी कटौती कर दी है। इस नए बदलाव का सीधा मकसद गरीब परिवारों तक बेहतर और अच्छी क्वालिटी का अनाज पहुंचाना है। हालांकि, मिलिंग के तय मानकों में कोई बदलाव न होने के कारण मिल कारोबारी इसे बड़ा नुकसान मान रहे हैं।

कनकी की सीमा घटी, गुणवत्ता पर जोर

खाद्य मंत्रालय के नए दिशा-निर्देशों के मुताबिक, अब अरवा चावल में कनकी की अधिकतम मात्रा सिर्फ 10 प्रतिशत ही स्वीकार की जाएगी। पहले यह सीमा 25 प्रतिशत तक थी। इसी तरह उसना चावल में कनकी की सीमा को 16 प्रतिशत से घटाकर महज 5 प्रतिशत कर दिया गया है।

बिक्री और स्टॉक प्रबंधन के मोर्चे पर सरकार को लंबे समय से मशक्कत करनी पड़ रही थी। देश में धान की बंपर पैदावार और चावल के भारी स्टॉक को खपाने के लिए पहले भी कई कदम उठाए गए। पुराने चावल की नीलामी करने से लेकर एथेनॉल प्लांटों को 2000 रुपये प्रति क्विंटल की रियायती दर पर धान बेचने जैसे उपाय भी अपनाए गए, लेकिन इससे वित्तीय नुकसान ही हुआ। इसी स्थिति से निपटने के लिए अब राशन के चावल की गुणवत्ता बढ़ाने का यह नया रास्ता चुना गया है।

मिलरों के सामने खड़ी हुई नई चुनौती

सरकार ने चावल जमा करने का आउटपुट अनुपात वही पुराना रखा है।

  • अरवा चावल: 100 किलो धान पर 67 किलो चावल जमा करना अनिवार्य है।

  • उसना चावल: 100 किलो धान पर 68 किलो चावल जमा करना होगा।

व्यावहारिक तौर पर धान की मिलिंग के दौरान अरवा में लगभग 33 फीसदी और उसना में 32 फीसदी तक कनकी निकलती है। अब अरवा में सिर्फ 10 प्रतिशत कनकी की छूट मिलने के बाद बची हुई 15 प्रतिशत अतिरिक्त कनकी को मिलर्स खुले बाजार में नहीं बेच पाएंगे। इसका इस्तेमाल और निपटान पूरी तरह सरकार तय करेगी, जिसे संभवतः एथेनॉल संयंत्रों में भेजा जा सकता है।

रायगढ़ के एक स्थानीय राइस मिलर ने नाम न उजागर करने की शर्त पर बताया, "कस्टम मिलिंग का बकाया भुगतान हमें पहले ही समय पर नहीं मिल पा रहा है। ऊपर से यह नया नियम थोप दिया गया। मोटे धान से इतना साबुत दाना निकलना मुमकिन नहीं होता कि 5 या 10 फीसदी कनकी का मापदंड पूरा हो सके। अगर ब्रोकन राइस का आंकड़ा बढ़ता है, तो कोटा पूरा करने के लिए मिलर्स को जेब से चावल खरीदना पड़ेगा।"

QR कोड से होगी सप्लाई चेन की निगरानी

कालाबजारी और हेराफेरी रोकने के लिए सरकार ने सप्लाई चेन में तकनीक का भी सहारा लिया है।

डिजिटल ट्रैकिंग: अब पीडीएस के लिए जाने वाली चावल की हर बोरी पर एक यूनिक QR कोड प्रिंट होगा। इस कोड को स्कैन करते ही यह जानकारी मिल जाएगी कि चावल किस मिल में तैयार हुआ, किस गोदाम में रखा गया और किस राशन दुकान तक पहुँचा।

इस पूरी व्यवस्था से चावल की जमाखोरी और गड़बड़ी पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी।

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