साइकिल किनारे छोड़ी और पैदल नाला पार किया
क्रोंधा से खड़गांव स्कूल का सफर बच्चों के लिए किसी परीक्षा से कम नहीं है। छात्र सबसे पहले अपनी साइकिल से नाले के तट तक आते हैं। फिर साइकिल को किनारे खड़ी कर पानी के बीच से गुजरते हैं। इसके बाद उन्हें करीब दो किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल पहुंचना पड़ता है।
बड़ा हादसा टला:
छात्राओं ने बताया कि कुछ दिन पहले नाला पार करते वक्त एक बच्ची पानी की धार में बहने लगी थी। सहपाठियों ने तत्परता दिखाते हुए उसे किसी तरह सुरक्षित निकाला।
स्कूली बच्चों के अलावा सामान्य ग्रामीणों और मरीजों के लिए भी यह रास्ता मुसीबत बन जाता है। बारिश में जलस्तर बढ़ते ही गांव का संपर्क कट जाता है।
वर्ष 2015 से सिर्फ मिल रहे आश्वासन
स्थानीय लोग वर्षों से इस सरिया नाले पर पक्के पुल की मांग कर रहे हैं। ग्रामीणों के मुताबिक वर्ष 2015 में जब विष्णुदेव साय केंद्रीय मंत्री थे, तब भी उन्होंने पुल निर्माण का भरोसा दिया था। राज्य का मुख्यमंत्री बनने के बाद भी उनकी ओर से पुल की घोषणा हुई, मगर धरातल पर काम शुरू नहीं हो पाया। जनप्रतिनिधियों और अफसरों के चक्कर काटकर अब ग्रामीण थक चुके हैं।
प्रभारी प्राचार्य नियमेश कुमार पटेल का बयान:
क्रोंधा से लगभग 50 बच्चे हमारे स्कूल आते हैं। नाले में पानी ज्यादा होने पर वे स्कूल नहीं आ पाते। कई बार बच्चों को साथ में अतिरिक्त कपड़े (यूनिफॉर्म) रखने पड़ते हैं।
सरपंच राम रतन सिंह राठिया का बयान:
गांव के लोगों को रोजमर्रा के कामों के लिए खड़गांव जाना पड़ता है। तत्कालीन सांसद से दो बार आश्वासन मिला था। अब उनके मुख्यमंत्री बनने से उम्मीदें और बढ़ गई हैं।
सेतु विभाग ने भेजा 10 करोड़ से अधिक का प्रस्ताव
प्रशासनिक उदासीनता से क्षेत्रवासियों में भारी आक्रोश है। इस बीच लोक निर्माण विभाग के सेतु संभाग ने मामले में प्रगति की जानकारी दी है।
सेतु विभाग के कार्यपालन अभियंता (EE) संतोष कुमार भगत ने बताया कि क्रोंधा से खड़गांव के बीच स्थित सरिया नाले पर उच्च स्तरीय पुल (High-Level Bridge) के निर्माण का प्रस्ताव स्वीकृति के लिए भेजा जा चुका है। प्रस्तावित पुल की लंबाई 105 मीटर होगी और इसके निर्माण पर 10 करोड़ 17 लाख रुपये की अनुमानित लागत आएगी। प्रशासनिक मंजूरी मिलते ही आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
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