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UP/ सावन के महीने में इस बार कांवड़ यात्रा के दौरान एक अनोखी तस्वीर सामने आई है। हरिद्वार से गंगाजल भरकर गाजियाबाद के सिद्धपीठ दूधेश्वर महादेव मंदिर जा रहे 50 से अधिक पूर्व मुस्लिमों (एक्स-मुस्लिम) का जत्था रविवार को मेरठ पहुंचा। सरधना क्षेत्र के चौधरी चरण सिंह कांवड़ पटरी मार्ग से गुजरते इस जत्थे को देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। पूरे रास्ते श्रद्धालुओं और सामाजिक संगठनों ने इन पर फूल बरसाए। 'हर-हर महादेव' और 'बोल बम' के जयकारों से पूरा माहौल गूंज उठा।

पहली बार उठाई कांवड़, समाज से मिला सम्मान

इस यात्रा में सहारनपुर के रहने वाले शहजाद भी शामिल हैं, जिन्हें अब लोग शंकर नाम से जानते हैं। उनके साथ उनकी पत्नी रजिया (अब सावित्री) भी पहली बार कांवड़ उठाकर चल रही हैं। शंकर ने बताया कि उन्होंने अप्रैल 2026 में अपनी पत्नी और तीनों बच्चों के साथ अपनी मर्जी से सनातन धर्म अपनाया था।

भगवान शिव के प्रति उनकी आस्था इतनी गहरी हुई कि उन्होंने इस साल कांवड़ लाने का फैसला किया। शंकर का कहना है कि नए जीवन में उन्हें अपनों जैसा प्यार और सम्मान मिला है, जिसने उनके विश्वास को और मजबूत किया।

तीन दिन की पैदल यात्रा और नेतृत्व

बिजनौर के रहने वाले सरफराज उर्फ इमरोज आलम इस 50 से अधिक लोगों वाले जत्थे की अगुवाई कर रहे हैं। सनातन धर्म अपनाने के बाद उनका नाम अब राजन है। राजन ने साल 2025 में ही हिंदू धर्म स्वीकार किया था।

राजन के मुताबिक:

  • वे सनातन संस्कृति के आध्यात्मिक विचारों और पुरानी परंपराओं से काफी प्रभावित हुए।

  • इसी प्रभाव और भगवान शिव के प्रति अटूट श्रद्धा ने उन्हें हरिद्वार से जल उठाने की प्रेरणा दी।

  • यह तीन दिवसीय पैदल यात्रा केवल आस्था नहीं, बल्कि उनके आत्मिक जुड़ाव का प्रतीक है।

जगह-जगह हुआ स्वागत

कांवड़ पटरी मार्ग पर इस जत्थे के पहुंचते ही अन्य कांवड़ियों और स्थानीय निवासियों ने उनका उत्साह बढ़ाया। कई जगहों पर लोगों ने रुककर इनके लिए खाने-पीने और आराम की व्यवस्था की।

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