छत्तीसगढ़ की सरकारी स्वास्थ्य प्रणाली इस समय विशेषज्ञ चिकित्सकों की भारी कमी से जूझ रही है। विधानसभा में पेश किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, राज्य में चिकित्सा विशेषज्ञों के लगभग 80 प्रतिशत पद खाली पड़े हैं। जहां एक ओर सामान्य चिकित्सा अधिकारियों की संख्या संतोषजनक स्थिति में है, वहीं सुपर-स्पेशलिटी और विशेषज्ञ सेवाओं के अभाव ने ग्रामीण एवं दूरस्थ अंचलों में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विधानसभा में पेश आंकड़ों की स्थिति
स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, राज्य में चिकित्सा विशेषज्ञों के कुल 2,025 पद स्वीकृत हैं। इनमें से वर्तमान में केवल 408 विशेषज्ञ डॉक्टर ही कार्यरत हैं, जबकि 1,626 पद खाली पड़े हैं।
| संवर्ग (Category) | स्वीकृत पद | कार्यरत | रिक्त पद |
| चिकित्सा विशेषज्ञ (Specialists) | 2,025 | 408 | 1,626 |
| चिकित्सा अधिकारी (Medical Officers) | 2,699 | 2,391 | 308 |
| दंत चिकित्सक (Dentists) | 180 | 106 | 74 |
(नोट: विशेषज्ञ डॉक्टरों के स्वीकृत, कार्यरत और रिक्त आंकड़ों के आधिकारिक योग में 9 पदों का तकनीकी अंतर दर्ज है, जिसका अंतिम विभागीय मिलान अपेक्षित है।)
राजधानी से लेकर वनांचल तक: जिलेवार संकट
विशेषज्ञों का यह अभाव केवल ग्रामीण या आदिवासी क्षेत्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि शहरी केंद्रों में भी यही स्थिति बनी हुई है।
रायपुर (राजधानी): 106 स्वीकृत पदों में से 59 पद खाली हैं; केवल 47 विशेषज्ञ कार्यरत हैं।
मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी: 32 स्वीकृत पदों के मुकाबले एक भी विशेषज्ञ डॉक्टर पदस्थ नहीं है (उपलब्धता शून्य)।
सुकमा और सक्ती: दोनों जिलों में स्थिति अत्यंत चिंताजनक है, जहाँ क्रमशः 32 और 48 स्वीकृत पदों पर केवल 1-1 विशेषज्ञ ही पदस्थ हैं।
कबीरधाम: 84 स्वीकृत पदों में से 80 पद रिक्त हैं, केवल 4 डॉक्टर कार्यरत हैं।
बस्तर संभाग: बस्तर जिले में 92 में से 78, दंतेवाड़ा में 69 में से 64, और बीजापुर में 62 में से 55 पद खाली हैं।
उत्तर छत्तीसगढ़ (सरगुजा संभाग): सरगुजा में 108 में से 80, जशपुर में 113 में से 94, और बलरामपुर में 48 में से 45 पद रिक्त पड़े हैं।
मेडिकल ऑफिसर और दंत चिकित्सकों की स्थिति
सामान्य चिकित्सा अधिकारियों (MBBS) के स्तर पर स्थिति अपेक्षाकृत काफी बेहतर है। 2,699 पदों में से 2,391 डॉक्टर कार्यरत हैं।
दुर्ग, बिलासपुर, बलरामपुर और सूरजपुर जैसे कुछ जिलों में स्वीकृत पदों की तुलना में अधिक चिकित्सा अधिकारी पदस्थ हैं, जिसे कैडर पुनर्समायोजन और अतिरिक्त पदस्थापना का परिणाम माना जा रहा है।
वहीं, दंत चिकित्सकों के 180 पदों में से 74 रिक्त हैं। बीजापुर और दंतेवाड़ा जैसे जिलों में एक भी सरकारी दंत चिकित्सक कार्यरत नहीं है।
राज्य में स्वास्थ्य ढांचे को लेकर लंबे समय से सुधार के दावे किए जाते रहे हैं, किंतु नियमित भर्तियों के अभाव और डॉक्टरों के निजी क्षेत्र की ओर रुख करने से रिक्तियां बढ़ती गई हैं।
विपक्ष का पक्ष: कांग्रेस चिकित्सा प्रकोष्ठ के अनुसार, केवल पद स्वीकृत करने से व्यवस्था नहीं सुधरेगी। जब तक डॉक्टरों को बेहतर वेतनमान, सुरक्षित कार्य परिस्थितियां और अस्पतालों में आधुनिक संसाधन नहीं मिलेंगे, तब तक डॉक्टरों को सरकारी सेवा में रोके रखना कठिन होगा।
सिविल सोसायटी का विश्लेषण: छत्तीसगढ़ सिविल सोसायटी का कहना है कि मेडिकल काउंसिल में 17 हजार से अधिक डॉक्टर पंजीकृत होने के बावजूद पदों का खाली रहना चिंताजनक है। 2021 के बाद लोक सेवा आयोग (PSC) के माध्यम से नियमित भर्ती प्रक्रियाओं में कमी और अत्यधिक कार्यभार के कारण डॉक्टरों पर मानसिक तनाव बढ़ रहा है।
सरकार की कार्ययोजना: स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के अनुसार, सरकार डॉक्टरों की मांग और आपूर्ति के अंतर को पाटने के लिए निजी क्षेत्र की तर्ज पर 'आकर्षक टॉपअप पैकेज' लाने पर काम कर रही है। बस्तर-सरगुजा के लिए 20 से 75 हजार रुपये और शहरी क्षेत्रों के लिए 30 हजार से 1 लाख रुपये तक के अतिरिक्त वित्तीय प्रोत्साहन का प्रस्ताव है। साथ ही मेडिकल कॉलेजों और पीजी सीटों के विस्तार के जरिए आगामी 7–8 वर्षों में इस कमी को पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य रखा गया है।
छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य व्यवस्था के समक्ष वर्तमान में दो मुख्य चुनौतियां हैं—पहला, रिक्त पदों पर पारदर्शी एवं त्वरित भर्ती करना और दूसरा, नियुक्त डॉक्टरों को दूरस्थ क्षेत्रों में टिकाए रखना। जब तक विशेषज्ञ डॉक्टरों की पर्याप्त उपलब्धता जमीनी स्तर पर सुनिश्चित नहीं होती, तब तक सुदूर अंचलों के मरीजों को गंभीर उपचार के लिए बड़े शहरों पर ही निर्भर रहना पड़ेगा।
FAQ
Q1: छत्तीसगढ़ में विशेषज्ञ डॉक्टरों के कितने पद खाली हैं?
विधानसभा आंकड़ों के अनुसार, 2,025 स्वीकृत विशेषज्ञ पदों में से 1,626 पद (लगभग 80%) खाली हैं।
Q2: क्या राज्य में सामान्य चिकित्सा अधिकारियों (MBBS) की भी भारी कमी है?
नहीं, चिकित्सा अधिकारियों के 2,699 पदों में से 2,391 पदों पर डॉक्टर कार्यरत हैं और केवल 308 पद रिक्त हैं।
Q3: डॉक्टरों को रोकने के लिए सरकार क्या कदम उठा रही है?
सरकार नए मेडिकल कॉलेज खोलने, पीजी सीटें बढ़ाने के साथ-साथ डॉक्टरों के लिए 20 हजार से 1 लाख रुपये तक के विशेष वित्तीय टॉपअप पैकेज की योजना बना रही है।
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