परियोजना का काम खत्म होते ही यहाँ कक्षा 6वीं से 12वीं तक के छात्रों के लिए पढ़ाई और रहने की आधुनिक सुविधा उपलब्ध होगी। हालांकि, भवन निर्माण अंतिम चरण में होने के बावजूद शासन ने अभी यह तय नहीं किया है कि स्कूल किस शिक्षा बोर्ड से संबद्ध होगा।
शिक्षकों की भर्ती और बोर्ड का फैसला बाकी
इमारत तैयार होने के साथ ही स्कूल की पढ़ाई शुरू करने के लिए सरकार को जल्द कुछ बड़े फैसले लेने होंगे।
बोर्ड का चयन: स्कूल सीबीएसई, आईसीएसई या किसी अंतरराष्ट्रीय बोर्ड से जुड़ेगा, इस पर निर्णय पेंडिंग है।
शिक्षकों की नियुक्ति: अध्यापकों और प्रशासनिक कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया अभी शुरू होनी बाकी है।
प्रवेश प्रक्रिया: एडमिशन के नियम और शर्तें भी तय की जानी हैं।
सितंबर 2022 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने दावा किया था कि 1,000 छात्रों की क्षमता वाला यह स्कूल 2023 से शुरू हो जाएगा। लेकिन बजट की कमी और निर्माण में देरी के कारण समय सीमा चूक गई। पूर्ववर्ती सरकार ने शुरुआत में 26 करोड़ रुपये जारी किए थे। बाद में सत्ता परिवर्तन के कारण अतिरिक्त बजट अटकने से ठेकेदार ने काम रोक दिया था, जिसे वित्तीय मंजूरी मिलने के बाद दोबारा शुरू किया गया।
दो चरणों में होना है कैंपस का विकास
शिक्षक दिवस के अवसर पर तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस वर्ल्ड-क्लास प्रोजेक्ट का वर्चुअल शिलान्यास किया था। इसके संचालन के लिए बनी समिति के अध्यक्ष मुख्यमंत्री और उपाध्यक्ष स्कूल शिक्षा मंत्री बनाए गए थे।
कैंपस को दो चरणों में तैयार करने का प्लान था:
पहला चरण: मुख्य अकादमिक भवन, लैब, हॉस्टल, डाइनिंग हॉल, इनडोर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, स्विमिंग पूल, घुड़सवारी की सुविधा और खेल मैदान।
दूसरा चरण: बड़ा ऑडिटोरियम और अतिरिक्त आवासीय ब्लॉक।
विधानसभा में उठा निर्माण की धीमी रफ्तार का मुद्दा
हाल ही में हुए मानसून सत्र के दौरान भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने इस प्रोजेक्ट की धीमी गति और बजट पर सवाल उठाया था।
इसके जवाब में स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने बताया कि 5 अक्टूबर 2021 को मंजूर हुई इस योजना का काम 10 सितंबर 2022 से चालू हुआ था। फिलहाल 70 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। मंत्री के अनुसार, 49.52 करोड़ रुपये की स्वीकृत राशि में से 35.89 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। वर्तमान में यहाँ 700 बच्चों की पढ़ाई और 328 विद्यार्थियों के रहने की क्षमता विकसित की जा रही है।
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