बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पुलिस विभाग में आरक्षक (कांस्टेबल) से प्रधान आरक्षक (हेड कांस्टेबल) के पद पर पदोन्नति के लिए तैयार की गई वरिष्ठता सूची और उसके आधार पर जारी फिट लिस्ट को निरस्त कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि अपने स्वयं के अनुरोध (स्वैच्छिक आधार) पर दूसरे जिले में स्थानांतरण कराने वाले पुलिसकर्मियों को उनकी मूल नियुक्ति तिथि का लाभ देकर पदोन्नति सूची में वरिष्ठ नहीं माना जा सकता।
तबादले वाले जवान सूची में होंगे सबसे नीचे
जस्टिस बी.डी. गुरु की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए 13 फरवरी 2026 के बाद जारी सभी विवादित वरिष्ठता और फिट सूचियों को रद्द करने का आदेश दिया। अदालत ने कहा कि जो जवान निजी कारणों से स्थानांतरित होकर नए जिले में आए हैं, उन्हें उस जिले के संवर्ग में उनके तबादला आदेश की तारीख से वरिष्ठता सूची में सबसे नीचे रखा जाएगा।
कोर्ट ने गृह विभाग, पुलिस मुख्यालय (PHQ), रेंज आईजी और संबंधित जिला पुलिस अधीक्षकों (SP) को निर्देशित किया है कि वे संशोधित नियम 16-ए के तहत नए सिरे से वरिष्ठता तय कर ही पदोन्नति (DPC) की प्रक्रिया पूरी करें।
नियम 16-ए के उल्लंघन पर कोर्ट का कड़ा रुख
याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई थी कि राज्य सरकार ने 13 फरवरी 2026 को राजपत्र में नया नियम 16-ए अधिसूचित किया था। इसके तहत आरक्षक और प्रधान आरक्षक जिला संवर्ग के पद हैं।
इस नियम के अनुसार:
प्रशासनिक आधार पर स्थानांतरण होने की स्थिति में ही पुरानी सेवा अवधि को वरिष्ठता में जोड़ा जाएगा।
स्वयं के अनुरोध पर अन्य जिले में तबादला लेने पर कर्मचारी को नए जिले की वरिष्ठता सूची में सबसे नीचे स्थान मिलेगा।
इसके बावजूद विभाग ने अप्रैल 2026 में स्थानांतरण के स्वरूप की जांच किए बिना पुरानी तारीखों के आधार पर सूची तैयार कर दी थी।
कोरबा, रायपुर, बालोद, सरगुजा, रायगढ़, जशपुर और सारंगढ़-बिलाईगढ़ सहित कई जिलों के आरक्षकों (लव कुमार पात्रे, तारेश्वर नाथ केशरी, रवि तिवारी, सुरेंद्र कुमार देशमुख आदि) ने हाईकोर्ट में याचिकाएं दाखिल की थीं। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि वे पिछले 16-17 वर्षों से अपने मूल जिलों में सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन अन्य जिलों से अनुरोध पर आए जवानों को पुरानी भर्ती तिथि के आधार पर उनसे ऊपर रख दिया गया।
विभाग में दी गई आपत्तियों को सक्षम अधिकारियों द्वारा 4 मई 2026 को बिना विधिवत परीक्षण खारिज किए जाने के बाद पुलिसकर्मियों को अदालत की शरण लेनी पड़ी थी।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि गलत तरीके से तय वरिष्ठता से किसी कर्मचारी को वैधानिक अधिकार नहीं मिलता। यह फैसला किसी याचिकाकर्ता को सीधे पदोन्नति नहीं देता, बल्कि विभाग को नियम 16-ए के अनुरूप नई निष्पक्ष सूची बनाकर पात्रता और योग्यता के आधार पर डीपीसी प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश देता है।
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