नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) की संचालन और सुरक्षा प्रणाली पूरी तरह फूलप्रूफ है, जिसमें किसी भी स्तर पर सेंध लगाना अत्यंत कठिन है। केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने शीर्ष अदालत के समक्ष प्रश्नपत्र निर्माण, चयन, परिवहन और प्रिंटिंग की बहुस्तरीय गोपनीय प्रक्रिया का विस्तृत ब्योरा पेश किया।
500 सवालों के बैंक से तैयार होते हैं प्रश्नपत्र
सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को अवगत कराया कि परीक्षा प्रक्रिया के तहत सबसे पहले विभिन्न मॉडरेटर्स की मदद से 500 प्रश्नों का एक बड़ा क्वेश्चन बैंक तैयार किया जाता है। मॉडरेटर्स को यह ज्ञात नहीं होता कि अंतिम परीक्षा में कौन से प्रश्न शामिल होंगे।
इसके बाद:
अन्य मॉडरेटर्स द्वारा इन 500 प्रश्नों में से 100-100 प्रश्न चुनकर 4 अलग-अलग प्रश्नपत्र तैयार किए जाते हैं।
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के महानिदेशक (DG) इन चार में से किन्हीं दो प्रश्नपत्रों का अंतिम चयन करते हैं।
चुने गए प्रश्नपत्रों को सीलबंद बॉक्सों में सुरक्षित रखकर दो अलग-अलग प्रिंटिंग प्रेसों में भेजा जाता है।
सीक्रेट कोड, CISF सुरक्षा और GPS ट्रैकिंग
छपाई और वितरण के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जाते हैं। प्रश्नपत्र वाले बॉक्स को खोलने के लिए डिजिटल चाबी और NTA के महानिदेशक द्वारा जारी किए जाने वाले विशेष गुप्त (सीक्रेट) कोड की आवश्यकता होती है। जब प्रिंटिंग प्रेस संचालक इस गुप्त कोड को दर्ज करता है, तभी बॉक्स खोला जा सकता है।
प्रिंटिंग का पूरा कार्य सीआईएसएफ (CISF) की कड़ी सुरक्षा और सीसीटीवी कैमरों की लगातार निगरानी में होता है। इस दौरान किसी भी बाहरी व्यक्ति का प्रवेश वर्जित रहता है और पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग की जाती है। साथ ही, प्रश्नपत्र ले जाने वाले वाहनों में जीपीएस (GPS) लगा होता है, जिससे उनकी हर गतिविधि पर नजर रखी जाती है।
NEET परीक्षा की शुचिता और पारदर्शी संचालन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान यह तथ्य प्रस्तुत किए गए। अदालत ने परीक्षा प्रणाली में निरंतर सुधार के लिए गठित उच्चस्तरीय समितियों की भूमिका पर भी संज्ञान लिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) और केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वे न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) राधाकृष्णन समिति और नंदन नीलेकणि समिति की सिफारिशों को लागू करने की दिशा में उठाए गए कदमों का ब्योरा देते हुए एक विस्तृत हलफनामा (Affidavit) दाखिल करें।
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