बैठक के दौरान प्रधान जिला न्यायाधीश ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि राजीनामा योग्य प्रकरणों को चिन्हांकित कर सूचीबद्ध किया जाए। साथ ही पक्षकारों से संपर्क बनाकर प्री-सिटिंग की प्रभावी कार्यवाही शुरू करने पर बल दिया गया ताकि मामलों का सौहार्दपूर्ण और त्वरित निपटारा हो सके।
बैठक में प्रकरणवार समीक्षा करते हुए समय पर सूचना भेजने और आपसी समझौते की संभावना बढ़ाने की रणनीति बनाई गई। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे इस लोक अदालत का लाभ उठाकर लंबित विवादों का स्थायी समाधान प्राप्त करें।
"राष्ट्रीय लोक अदालत न्याय प्राप्ति का एक प्रभावी एवं सरल माध्यम है, जिसके द्वारा पक्षकारों को कम समय एवं कम खर्च में आपसी सहमति से विवादों का स्थायी समाधान प्राप्त होता है। अतः सभी न्यायिक अधिकारी एवं संबंधित अधिकारी समन्वित रूप से कार्य करते हुए अधिकाधिक प्रकरणों के निराकरण का प्रयास करें।" — खिलावन राम रिगरी, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, कोंडागांव
अदालत में लंबित राजीनामा योग्य मामलों के पक्षकार इस लोक अदालत के जरिए कम समय और कम खर्च में अपने विवादों का स्थायी व आपसी सहमति से समाधान करा सकते हैं। इससे उन्हें बार-बार कोर्ट के चक्कर लगाने से राहत मिलेगी।
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