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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और श्रम एवं उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ श्रम विभाग ने प्रशासनिक और तकनीकी स्तर पर व्यापक बदलाव किए हैं। विभाग ने पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए 'श्रमेव जयते' मोबाइल एप और नई यूजर-फ्रेंडली वेबसाइट लॉन्च की है, जिससे आवेदन और पंजीयन की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन हो गई है। इसके अलावा, योजनाओं की राशि सीधे लाभार्थियों के खातों में भेजने के लिए प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) प्रणाली लागू की गई है।

प्रशासनिक स्तर पर राज्य के सभी 33 जिलों में श्रम कार्यालयों का संचालन शुरू कर दिया गया है। हाल ही में गठित 5 नए जिलों—मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, सारंगढ़-बिलाईगढ़, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर और सक्ती में श्रम अधिकारी कार्यालयों के लिए 20 पदों का सृजन किया गया है। वर्तमान में प्रदेश में 10 सहायक श्रमायुक्त और 23 श्रम पदाधिकारी कार्यालय कार्यरत हैं।

1 जनवरी 2024 से 30 जून 2026 तक राज्य में 12.65 लाख नए श्रमिकों का पंजीयन किया गया है। निर्माण श्रमिकों को लगभग 780 करोड़ रुपये और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को 187 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता दी गई है। महिला श्रमिकों की सुरक्षा के लिए 'मिनीमाता महतारी जतन योजना' के तहत 1.60 लाख से अधिक महिलाओं को मातृत्व सहायता दी गई है। वहीं, 'शहीद वीरनारायण सिंह श्रम अन्न योजना' के अंतर्गत पंजीकृत श्रमिकों को 5 रुपये में पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।

"मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा श्रमिकों एवं उनके परिजनों की बेहतरी के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं, इन योजनाओं के माध्यम से श्रमिकों की सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति में सुधार हो रहा है।" — श्रम विभाग, छत्तीसगढ़ सरकार

मुख्यबिंदु

  • बड़ा लाभ वितरण: 17.82 लाख श्रमिकों को 800 करोड़ रुपये से अधिक की आर्थिक सहायता राशि DBT के माध्यम से ट्रांसफर की गई।

  • नया प्रशासनिक ढांचा: राज्य के सभी 33 जिलों में श्रम कार्यालय सक्रिय, 5 नए जिलों के लिए 20 नए पदों का सृजन।

  • आवास सहायता में वृद्धि: 'मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक आवास सहायता योजना' के तहत मिलने वाली राशि बढ़ाकर 1.50 लाख रुपये की गई।

  • डिजिटल पहल: ऑनलाइन सेवाओं के लिए 'श्रमेव जयते' मोबाइल एप और पोर्टल लॉन्च, साथ ही 24x7 मुख्यमंत्री श्रमिक सहायता केंद्र की शुरुआत।

  • श्रम कानूनों में संशोधन: महिला श्रमिकों के लिए रात्रिकालीन कार्य की अनुमति, फिक्स्ड टर्म एम्प्लॉयमेंट और फैक्ट्री लाइसेंस की अवधि में बढ़ोतरी।

राज्य में संगठित, असंगठित और निर्माण श्रमिकों के हितों की रक्षा के लिए विभिन्न श्रम कल्याण मंडलों के माध्यम से कुल 67 कल्याणकारी योजनाएं चलाई जा रही हैं। दूरस्थ क्षेत्रों के श्रमिकों को पंजीयन, नवीनीकरण और आवेदन संबंधी समस्याओं से राहत देने के लिए राज्यभर में मोबाइल शिविरों का आयोजन किया जा रहा है।

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