छत्तीसगढ़ में कार्यरत शिक्षकों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्पष्ट किया है कि शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता के कारण किसी भी शिक्षक की सेवा समाप्त नहीं होगी। देर रात 'छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन' के प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई बैठक में मुख्यमंत्री ने शिक्षकों की सेवा सुरक्षा और वेतन विसंगति से जुड़े मुद्दों पर सकारात्मक रुख दिखाया।
टीईटी अनिवार्यता और पदोन्नति पर सरकार का रुख
प्रांतीय संयोजक मनीष मिश्रा और जशपुर जिलाध्यक्ष अजय कुमार गुप्ता के नेतृत्व में मिले प्रतिनिधिमंडल ने पदोन्नति और सेवा में टीईटी की शर्त से उत्पन्न चिंताओं को मुख्यमंत्री के समक्ष रखा।
मुख्यमंत्री साय ने शिक्षकों को आश्वस्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार अप्रशिक्षित शिक्षकों को टीईटी उत्तीर्ण कराने के लिए उचित व्यवस्था तैयार करने पर काम कर रही है। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश और ओडिशा जैसे पड़ोसी राज्यों के मॉडल का अध्ययन किया जा रहा है, ताकि छत्तीसगढ़ में भी व्यावहारिक रास्ता निकाला जा सके।
वेतन विसंगति के समाधान के लिए विभागीय चर्चा का भरोसा
बैठक में सहायक शिक्षकों की लंबे समय से लंबित वेतन विसंगति का विषय भी प्रमुखता से उठा। प्रतिनिधिमंडल ने सरकार को ध्यान दिलाया कि यह विषय 'मोदी की गारंटी' का भी हिस्सा रहा है। मुख्यमंत्री ने इस पर संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों से विचार-विमर्श कर समाधानकारी कदम उठाने की बात कही।
शिक्षिकाओं ने बांधा रक्षा सूत्र
छत्तीसगढ़ में सहायक शिक्षकों की पदोन्नति और सेवा निरंतरता में टीईटी की अनिवार्यता को लेकर संशय की स्थिति बनी हुई थी, जिससे शिक्षक समुदाय में भविष्य को लेकर आशंकाएं थीं। इसके अतिरिक्त सहायक शिक्षक लंबे समय से प्राथमिक स्तर पर वेतन विसंगति दूर करने की मांग कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री के स्पष्ट आश्वासन के बाद प्रदेश भर के शिक्षकों में सेवा सुरक्षा को लेकर राहत देखी जा रही है। फेडरेशन ने स्पष्ट किया है कि वे सरकार के आगामी प्रशासनिक कदमों पर नजर रखेंगे और शिक्षक हितों के लिए संवाद जारी रखेंगे।
खबरें नहीं सच का प्रहार


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