गंगरेल के जंगल में लहूलुहान मिला अजगर
8 अगस्त को गंगरेल के जंगल में स्थानीय लोगों ने एक विशालकाय अजगर को गंभीर चोटों के साथ देखा। घटना की सूचना तुरंत वन विभाग को दी गई। विभाग की टीम ने सर्प मित्र नीरज पांडेय के सहयोग से मौके पर पहुँचकर अजगर को सुरक्षित काबू में लिया और धमतरी वन परिक्षेत्र कार्यालय पहुँचाया।
धमतरी में वन परिक्षेत्र अधिकारी और डिप्टी रेंजर की उपस्थिति में पशु चिकित्सक डॉ. मयंक पटेल ने अजगर का चिकित्सकीय परीक्षण किया। जांच में पाया गया कि अजगर के सिर, पूंछ और शरीर के अन्य हिस्सों पर गहरे घाव हैं। प्राथमिक आशंका जताई जा रही है कि किसी ने अजगर पर भारी पत्थर या किसी कठोर वस्तु से हमला किया था।
रायपुर जंगल सफारी में विशेषज्ञ देखभाल
डॉ. मयंक पटेल द्वारा तत्काल प्राथमिक उपचार दिए जाने के बाद अजगर की स्थिति में सुधार आया। घाव गहरे होने के कारण डिप्टी रेंजर और विभागीय अधिकारियों ने इसे उच्च स्तरीय देखरेख में रखने का निर्णय लिया।
इसके बाद शनिवार रात अजगर को राजधानी रायपुर स्थित नंदनवन जंगल सफारी भेज दिया गया। वर्तमान में वन्यजीव विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम उसकी रिकवरी पर लगातार नज़र बनाए हुए है।
भारतीय अजगर (Python molurus) भारत में संरक्षित वन्यजीवों की श्रेणी में आता है। जंगलों के आसपास मानवीय गतिविधियों और जागरूकता की कमी के कारण अक्सर ये जीव मानव-वन्यजीव संघर्ष का शिकार हो जाते हैं। गंगरेल वन क्षेत्र पर्यटकों और स्थानीय निवासियों की आवाजाही का प्रमुख केंद्र है, जहाँ वन्यजीवों की सुरक्षा एक महत्वपूर्ण विषय बनी रहती है।
गंगरेल में हुई यह घटना वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठाती है। वन विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी घायल या भटकते वन्यजीव को नुकसान न पहुँचाएँ और न ही उसे खुद पकड़ने की कोशिश करें। ऐसी स्थिति में तुरंत वन विभाग या पुलिस को सूचित करें ताकि समय पर जीवों की रक्षा की जा सके।
खबरें नहीं सच का प्रहार


No comments:
Post a Comment