रायपुर: छत्तीसगढ़ में कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करने और जनता के साथ संवाद को बेहतर बनाने के लिए एक नई प्रशासनिक पहल शुरू की गई है। राज्य के 125 से अधिक भारतीय पुलिस सेवा (IPS) और राज्य पुलिस सेवा के वरिष्ठ अधिकारियों ने अलग-अलग थानों को गोद लिया है। इस पहल के तहत राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) अरुण देव गौतम ने बिलासपुर जिले के ऐतिहासिक रतनपुर थाने को गोद लिया है।
अधिकारियों को थानों का आवंटन
इस योजना के तहत कई वरिष्ठ अधिकारियों को विभिन्न जिलों के थानों का प्रभार सौंपा गया है:
एसआरपी कल्लूरी: कोतवाली थाना (बस्तर)
प्रदीप गुप्ता: तुमगांव थाना (महासमुंद)
विवेकानंद: चरामा थाना (कांकेर)
दीपांशु काबरा: कोतवाली थाना (अंबिकापुर)
अमित कुमार: लालबाग थाना (राजनांदगांव)
डॉ. आनंद छाबड़ा: घरघोड़ा थाना (रायगढ़)
ओपी पाल: बिलाईगढ़ थाना (सारंगढ़-बिलाईगढ़)
अजय यादव: पथरिया थाना (मुंगेली)
डॉ. संजीव शुक्ला: टिकरापारा थाना (रायपुर)
अमरेश मिश्रा: हथबंध थाना (बलौदाबाजार)
बीएन मीणा: गुंडरदेही थाना (बालोद)
एमएल कोतवानी: अमलेश्वर थाना (दुर्ग)
आजाद शत्रु: कोतवाली थाना (महासमुंद)
थानों के आधुनिकीकरण और निगरानी पर फोकस
गोद लिए गए थानों में वरिष्ठ अधिकारियों की सीधी निगरानी रहेगी। अधिकारियों का मुख्य ध्यान बीट पुलिसिंग और कम्युनिटी पुलिसिंग को सशक्त करने पर होगा, जिससे संदिग्ध गतिविधियों और आपराधिक तत्वों पर नजर रखी जा सके। इसके अलावा रिकॉर्ड्स के व्यवस्थित रख-रखाव, मालखानों के आधुनिकीकरण, लंबित प्रकरणों के त्वरित निस्तारण और आम नागरिकों की शिकायतों का तय समय सीमा में समाधान सुनिश्चित करने पर काम किया जाएगा।
नवा रायपुर में आयोजित 60वीं अखिल भारतीय डीजीपी-आईजीपी कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को कम से कम एक-एक थाना गोद लेने का सुझाव दिया था। इसी दिशा-निर्देश के क्रियान्वयन के तहत छत्तीसगढ़ पुलिस विभाग ने यह कदम उठाया है, ताकि जमीनी स्तर पर थानों की कार्यशैली में सुधार लाया जा सके।
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