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USA/  नवंबर 2026 में होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों (Midterm Elections) से पहले देश की चुनावी व्यवस्था और मतदान नियमों को लेकर राजनीतिक पारा चढ़ गया है। 'सेफगार्ड अमेरिकन वोटर एलिजिबिलिटी' यानी 'सेव अमेरिका एक्ट' (SAVE Act) को लेकर सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों के बीच तीखा गतिरोध बना हुआ है। जहां एक पक्ष इसे चुनावी शुचिता और गैर-नागरिकों के मतदान पर रोक के लिए अपरिहार्य बता रहा है, वहीं दूसरा पक्ष इसे लाखों वैध अमेरिकी नागरिकों को मताधिकार से वंचित करने वाला कदम करार दे रहा है।

क्या है 'सेव अमेरिका एक्ट' और मुख्य प्रावधान?

'सेव अमेरिका एक्ट' का मुख्य उद्देश्य संघीय चुनावों (Federal Elections) में मतदाता पंजीकरण प्रक्रिया को पूरी तरह बदलना है। इस कानून के तहत प्रमुख प्रावधान शामिल किए गए हैं:

  • नागरिकता का दस्तावेजी प्रमाण (DPOC): मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए पासपोर्ट, जन्म प्रमाण पत्र या नागरिकता प्रमाण पत्र व्यक्तिगत रूप से दिखाना अनिवार्य होगा।

  • फोटो पहचान पत्र की अनिवार्यता: मतदान के दिन पोलिंग बूथ पर वैध सरकारी फोटो आईडी प्रस्तुत करना आवश्यक होगा।

  • ऑनलाइन और डाक पंजीकरण पर असर: इन-पर्सन दस्तावेजी सत्यापन अनिवार्य होने से अधिकांश राज्यों में चल रहे ऑनलाइन और मेल-इन वोटर रजिस्ट्रेशन के स्वरूप में व्यापक बदलाव आएगा।

  • अधिकारियों पर जवाबदेही: बिना उचित नागरिकता दस्तावेजों के किसी व्यक्ति का पंजीकरण करने वाले चुनाव अधिकारियों पर दंडात्मक कार्रवाई के प्रावधान हैं।

राजनीतिक दलों के अलग-अलग तर्क

इस कानून को लेकर दोनों प्रमुख दलों का दृष्टिकोण पूरी तरह विपरीत है:

  • रिपब्लिकन पार्टी का रुख: रिपब्लिकन नेताओं का तर्क है कि लोकतंत्र की सुरक्षा के लिए यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि केवल अमेरिकी नागरिक ही मतदान करें। उनका कहना है कि कड़े फोटो आईडी नियम और नागरिकता सत्यापन से चुनावी धोखाधड़ी रुकेगी और चुनाव परिणामों में जनता का विश्वास बढ़ेगा।

  • डेमोक्रेटिक पार्टी और अधिकार समूहों का पक्ष: डेमोक्रेट्स और नागरिक अधिकार संगठनों का कहना है कि 1996 के संघीय कानून के तहत गैर-नागरिकों का मतदान पहले से ही पूरी तरह गैरकानूनी और दंडनीय है। उनका आरोप है कि करोड़ों वैध नागरिकों, विशेषकर विवाहित महिलाओं (जिनके उपनाम बदल चुके हैं), ग्रामीण आबादी, युवाओं और निम्न-आय वर्ग के लोगों के पास तुरंत ये कागजात उपलब्ध नहीं होते, जिससे वे मतदान से वंचित हो सकते हैं।

  • अमेरिकी राजनीति में मतदाता पहचान पत्र और वोटिंग अधिकारों का मुद्दा हमेशा से बेहद संवेदनशील रहा है। 1993 के 'नेशनल वोटर रजिस्ट्रेशन एक्ट' (NVRA) के तहत राज्यों को अपने स्तर पर सुगम पंजीकरण और ऑनलाइन व्यवस्था की अनुमति मिली हुई है।

प्रतिनिधि सभा (House of Representatives) में पारित होने के बाद अब सीनेट और विधायी प्रक्रियाओं में इस पर तीखी बहस चल रही है। 2026 के मध्यावधि चुनावों में कांग्रेस (सीनेट और प्रतिनिधि सभा) के नियंत्रण की लड़ाई के बीच यह कानून सबसे बड़ा राजनीतिक और चुनावी मुद्दा बन गया है।

नवंबर के मध्यावधि चुनाव जैसे-जैसे करीब आ रहे हैं, वोटिंग नियमों की यह कानूनी और राजनीतिक लड़ाई और तीव्र होने के आसार हैं। चुनाव प्रक्रिया को 'सुरक्षित' बनाने और प्रत्येक नागरिक के लिए 'सुलभ' रखने के बीच का यह संतुलन 2026 के अमेरिकी चुनावी परिदृश्य की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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