छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य के शासकीय नर्सिंग कॉलेजों में नियमित पदों पर भर्ती से जुड़े एक अहम मामले में कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने अपने तीन साल पुराने फैसले पर अमल न होने पर चिकित्सा शिक्षा विभाग के सचिव अमित कटारिया (IAS) को अवमानना का नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। मामला डेमोंस्ट्रेटर और सहायक प्राध्यापक (Assistant Professor) के पदों पर भर्ती से जुड़ा हुआ है।तीन साल बाद भी फैसले पर अमल नहीं
अभय कुमार किस्पोट्टा, डॉ. अजय त्रिपाठी और अन्य अभ्यर्थियों ने अधिवक्ता नेल्सन पन्ना, आशुतोष मिश्रा और रूपेश साहू के जरिए यह अवमानना याचिका दायर की है।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने 9 मार्च 2023 को दिए अपने फैसले में 100 प्रतिशत महिला आरक्षण के प्रावधान को असंवैधानिक करार देकर निरस्त कर दिया था। कोर्ट का स्पष्ट मानना था कि शासकीय नर्सिंग कॉलेजों में सीधी भर्ती के दौरान महिलाओं को शत-प्रतिशत आरक्षण देना संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन है।
इस फैसले के बाद भर्ती नियम 2013 और 8 दिसंबर 2021 की विज्ञप्ति के विवादित क्लॉज को रद्द कर दिया गया था। मगर तीन साल बीत जाने के बाद भी विभागीय स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
CGPSC ने मांगा था संशोधित अधियाचन
अदालत के फैसले के तुरंत बाद 15 मार्च 2023 को छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) ने चिकित्सा शिक्षा विभाग को बाकायदा एक पत्र भेजा था। इसमें हाईकोर्ट के निर्णय के आधार पर संशोधित अधियाचन (Revised Requisition) भेजने का आग्रह किया गया था ताकि नियमित भर्ती प्रक्रिया को फिर से शुरू किया जा सके।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि पत्र मिलने के बावजूद न तो नियमों में जरूरी संशोधन किए गए और न ही संशोधित प्रस्ताव आयोग को भेजा गया।
क्या था मामला? वर्ष 2021 की भर्ती प्रक्रिया में 100% महिला आरक्षण के क्लॉज को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने इसे असंवैधानिक माना, फिर भी विभाग ने संशोधित अधियाचन भेजने के बजाय मामला लटकाए रखा।
नियमित पदों के बजाय निकाली संविदा भर्ती
नियमित प्रक्रिया ठप पड़ी रही और इसी बीच विभाग ने 22 जून 2026 को संविदा भर्ती का नया विज्ञापन जारी कर दिया। अभ्यर्थियों ने इस कदम को भी हाईकोर्ट में चुनौती दी है।
सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि राज्य सरकार को CGPSC के पत्र की पूरी जानकारी थी। फिर भी आदेश पर अमल करने के बजाय संविदा भर्ती का रास्ता चुना गया। वकीलों ने इसे अदालत के आदेश की जानबूझकर की गई अनदेखी (Wilful Disobedience) करार दिया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए 23 जुलाई 2026 को सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने IAS अमित कटारिया को नोटिस जारी किया। अब सचिव की ओर से दाखिल होने वाले जवाब के बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी।
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